आदिवासी हिन्‍दु नही है

आदिवासी कौन है ?

आदिवासी कोनसा धर्म मानता है ?

आदिवासी की परम्‍परायें क्‍या है ?

आदिवासियों की कोई भी परम्‍परा अन्‍य धमों से मेल क्‍यो नही खाती है ?

एेसे अनेकों प्रश्‍न है जो यह सोचने पर मजबूर करते है कि आदिवासी वास्‍तव में कौन है ?

आईये आज देखते है कि आदिवासी कौन है।

(1) जनगणना के आकडों के अनुसार आदिवासी क्‍या है ?

भारत देश की जनगणना केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रत्‍येक 10 वर्ष के अन्‍तराल पर सम्‍पन्‍न कराई जाती है। जनगणना में सभी प्रकार के आकड्रे मौजुद रहते है।

भारत की जनगणना की शुरूआत अंग्रेजों ने 1871-72 में की थी, तब से लेकर आज तक प्रत्‍येक 10 वर्ष में यह जनगणना सम्‍पन्‍न कराई जाती है।

आईये देखते है,

जनगणना के आकडों के हिसाब से आदिवासी को क्‍या कहा गया है।

जनगणना वर्ष आदिवासी के लिये प्रयुक्‍त शब्‍द पेज नम्‍बर dOWNLOAD ORIGIONAL FILE
1871 Aborgine 17, 18,19,22,23 CENCUS 1871
1881 Aborigional 51, 54,96,128 CENCUS 1881
1891 Aborigional 25,27,35,49,57 CENCUS 1891
1901 Animist 57, 68, 76,80,103,268 CENCUS 1901
1911 Animist 24, 44, 52, 56,57 CENCUS 1911
1921 Animist 14, 26, 38, 40, 53 CENCUS 1921
1931 Tribal Religion 4, 202, 222, 223,225 CENCUS 1931
1941 Tribes 3, 31,108, 117, 119,137 CENCUS 1941
1951 Shedule Tribe 142, 144, 139, 196 CENCUS 1951

 

1871 से लेकर 1941 तक की जनगणना में आदिवासी को अन्‍य धमों से अलग धर्म में गिना गया है, जिसे Aborgines, Aborigional, Animist, Triabal Religion, Tribes आदि कहा गया है।

आदिवासी की गणना अलग ग्रुप में की गई है, लेकीन 1951 की जनगणना से आदिवासी को Shedule Tribe बना कर अलग गिनती करना बन्‍द कर दिया गया है।

क्‍यों आदिवासी का अलग धर्म खत्‍म कर दिया गया ?

1951 की जनगणना के पेज नम्‍बर 136 पर लिखा है कि -

In 1901 Animism was treated as separate religion, in 1931 .Animism was replaced by the Tribal religion and in 1941 the concept of religion gave place to that of community

इसका मतलब साफ है कि 1951 में आकर सरकार ने आदिवासी को जबरदस्‍ती अपने राजनैतिक फायदे के लिये अन्‍य धमों में शामिल कर दिया, जबकी इससे पहले आदिवासी की गणना अलग धर्म के रूप में की गई थी।

1951 की जनगणना के पेज नम्‍बर 196 पर लिखा है कि - E.A. Maxwell कनाडा से बांसवाडा में आदिवासियों के रिती-रिवाज और परम्‍पराओं पर अध्‍ययन करने के लिये आई थी। उसने आदिवासियों से उनकी परम्‍पराओं पर निम्‍न बातें जानी।

(a) They do not, as a regular rule worship before Hindu idols,

 

वे हिन्‍दुओं की मुर्तियों के आगे प्रार्थना नही करते थे।


(b) They do not enter Hindu temples,

 

वे हिन्‍दुओं के मन्दिरों में नही जाते थे।


(c) Thoy do not have images of idols in their houses,

 

उनके घरों में हिन्‍दु देवी-देवताओं की मुर्तियां / फोटो नही होते थे।


(d) They do not employ Brahmin: priest for any of their cer~monies, such as birth, marriage and death, but employ their own Bhopas and JogiS, who are Bh1Is,

 

वे अपने विवाह, जन्‍म, मरण आदि कार्यक्रमों में हिन्‍दु पण्डित को नही बुलाते थे। वे सिर्फ भोपा और जोगी को ही कार्यक्रमों में बुलाते थे, जो आदिवासी ही होते थे।


(e) They believe that on death they become Bhuts (spirits ) but they do not believe in re-birth in human or animal form,

वे मानते है कि आदिवासी मरने के बाद भूत, पूर्वज बन जाते है, लेकिन उनका पूर्नजन्‍म में विश्‍वास नही था।

 

(f) They live in great fear of evil spirits, and most of their religious practices are endeavours to propitiate these spirits, which always seem bent on harming them.

 

वे बुरी आत्‍माओं के डर के साये में रहते थें और उनके सभी कार्य कलाप इन बुरी आत्‍माओं से छुटकारा पाने के संबंध मे ही रहते है।

 

Miss Maxwell, in fact, leaves no room for doubt that the term'' Animist" would be thecorrect one to describe the religion of the Bhils whom she knows so well.

 

इससे साफ पता चलता है कि जनगणना के आकडों के अनुसार आदिवासी हिन्‍दु नही है ।

(2) आदिवासी की परम्‍पराओं के अनुसार आदिवासी हिन्‍दु नही है।

आदिवासी अपने सभी कार्य जमने फैरे (Anti-Clock wise, Right Hand Side) करते है।

आदिवासी समाज के जन्‍म से लेकर मरण तक के रि‍ती-रिवाज एवं परम्‍परायें गैर-आदिवासी समाज से अलग होते है। आदिवासी अपने सभी कार्य जमने फैरे (Anti-Clock wise, Right Hand Side) करते है।

आदिवासीयों के विवाह कार्यक्रम में फेरे जमने फेरे लिये जाते है।

विवाह कार्यक्रम में ब्राहमण पूजारी को नही बुलाया जाता है, यह कार्य भुआ, ढोली, जोगी आदि करते है।

आदिवासी खेती में खेत हांकना, पाटा देना, दामण हांकना आदि कार्य जमने फेरे से करते है।

रहट, गन्‍ने का रस निकालना आदि सभी यंत्र जमने फेरे घुमाये जाते है।

आदिवासी महिलायें घटी जमने फेरे घुमाती है।

आदिवासी पुरूष धोती एवं फेटा जमने फेरे ही बांधते है।

आदिवासी महिलायें साडी जमने फेरे ही पहनती है।

आदिवासी के सभी नत्‍य जैसे गैर आदि में जमने फेरे ही खेले जाते है।

होली के फेरे जमने फेरे होते है। पीपल के फेरे जमने हाथ से लगाये जाते है।

सामाजिक भोज में खाना जमने फेरे से परोसा जाता है, जबकी गैर-आदिवासी समाज में यह कार्य विपरित अर्थात डाबे हाथ से किये जाते है।

(3) आदिवासी के झण्‍डे (Flag) के अनुसार आदिवासी हिन्‍दु नही है।

  • आदिवासी समाज के लोग अपने धार्मिक स्‍थलों, खेताें, घरों आदि में एक विशिष्‍ट प्रकार का झण्‍डा लगाते है, जो अन्‍य धमों के झण्‍डों से अलग होता है।
  • आदिवासी झण्‍डें में सूरज, चांद, तारे इत्‍यादी सभी प्रतिक बने हुये होते है।
  • आदिवासी के झण्‍डें सभी रंग के होते है। वो किसी रंग विशेष से बंधे हुये नही होते है।
  • आदिवासी प्रक़ति पूजक होते है। वो प्रकति में पाये जाने वाले स्‍ाभी जीव, जन्‍तु, पहाड, नदियां, नाले, खेत इन सभी जीवीत वस्‍तुओं की पूजा करते है।
  • आदिवासी मानते है कि all living things have a soul अर्थात प्रकति की हर एक वस्‍तु में जीवन होता है।
  • भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्‍व के आदिवासी कहे जाने वाले आदिवासीयों के झण्‍डों में सूरज, चांद, तारे आदि कहीं ना कहीं बने हूये होते है।

आदिवासीयों के झण्‍डों में सूरज, चांद, तारे बने हूये होते है।

(4) हिन्‍दु विवाह अधिनियम 1955 के अनुसार आदिवासी हिन्‍दु नही है।

हिन्‍दु विवाह अधिनियम जो कि 1955 में बना है, उसके बिन्‍दु संख्‍या 2 पर उल्‍ल्‍ोख मिलता है कि यह अधिनियम अनुसूचित जनजाति के लोगों पर लागु नही होता है।

क्‍यों लागु नही होता है ? क्‍योकि यह सिर्फ हिन्‍दु धर्म को मानने वाले लोगों पर ही लागु होता है। भारतीय संविधान में वर्णित शेडूयल टाईब के लोगों पर लागु नही पडता है।

आप खुद ही अ्ंग्रेजी में स्‍वंय पढ कर देखे कि सच क्‍या है ?
Central Government Act
The Hindu Marriage Act, 1955

(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (1), nothing contained in this Act shall apply to the members of any Scheduled Tribe within the meaning of clause (25) of Article 366 of the Constitution unless the Central Government, by notification in the Official Gazette, otherwise directs."

A plain reading of Section 2(2) of the Act, shows the non-applicability of the Act to the members of any Scheduled Tribe unless the Central Government, by notification in the official Gazette, otherwise directs. Article 366 of the Constitution defines the expression and meaning of the word Scheduled Tribe which says, "Scheduled Tribes" means such tribes or tribal communities or parts of or groups within such tribes or tribal communities as are deemed Article 342 to be Scheduled Tribes for the purpose of the Constitution which is to be further read with Constitution (Scheduled Tribes) Order, 1950.

पूरा एक्‍ट यहां पर देखे - https://indiankanoon.org/doc/590166/

अनुसूचित जनजाति के लोगों पर लागु नही होता है।

(5) न्‍यायालय के फैसलों के अनुसार आदिवासी हिन्‍दु नही है।

भारत में समय-समय पर विभिन्‍न राज्‍यों की हाईकोर्ट ने अपने महत्‍वपूर्ण निर्णयों में साबित किया है कि आदिवास‍ियों पर हिन्‍दु विवाह अधिनियम 1955 लागु नही होता है।

क्‍यों लागु नही होता है ? सोचने की बात है।

क्‍या आदिवासी हिन्‍दु नही है ? नहीं है।

इसलिये तो हिन्‍दु विवाह अधिनियम आदिवासी पर लागु नही होता है।

आइये देखते है कुछ केस -

 

(1) Jharkhand High Court,

Rajendra Kumar Singh Munda vs Mamta Devi on 20 August, 2015,

F.A. No. 186 of 2008

CORAM: HON'BLE MR. JUSTICE D.N. PATEL HON'BLE MR. JUSTICE RATNAKER BHENGRA

इस केस में झारखण्‍ड हाई कोर्ट ने अपने पाइन्‍ट नम्‍बर 5 में लिखा है कि-

"Scheduled Tribes and Hindu Marriage Act, 1955 is not applicable either to them or to their marriages"

अनुसूचित जनजाति पर हिन्‍दु विवाह अधिनियम 1955 लागु नही पडता है।

पूरा केस यहां देखे - https://indiankanoon.org/doc/169899294/

 

(2) Madhya Pradesh High Court

Deepak Marawi vs Smt.Kalabai Judgement Given By: ... on 5 September, 2013

HIGH COURT OF MADHYA PRADESH JABALPUR
SINGLE BENCH: Hon'ble Shri Justice A.K. Shrivastava
MISCELLANEOUS CRIMINAL CASE No.198 of 2009

इस केस में मध्‍यप्रदेश हाई कोर्ट ने अपने पाइन्‍ट नम्‍बर 7 में लिखा है कि-

the second marriage is permissible according to the customs of the Gond community and further as to whether the provisions of Hindu Marriage Act are not applicable upon the parties.

अर्थात गोन्‍ड समूदाय में दूसरा विवाह मान्‍य है और इस समूदाय पर हिन्‍दु विवाह अधिनियम लागु नही होता है

पूरा केस यहां देखे - https://indiankanoon.org/doc/71445357/

 

(3) Kerala High Court

Against The Order/Judgment In Op ... vs By Advs.Sri.M.P.Ashok Kumar on 27 September, 2012

 IN THE HIGH COURT OF KERALA AT ERNAKULAM

PRESENT:  THE HONOURABLE MR.JUSTICE V.K.MOHANAN
& THE HONOURABLE MR. JUSTICE P.D.RAJAN
FRIDAY, THE 30TH DAY OF JANUARY 2015/10TH MAGHA, 1936
Mat.Appeal.No. 679 of 2012 ()
AGAINST THE ORDER/JUDGMENT IN OP 148/2011 of FAMILY COURT, KALPETTA DATED 27-09-2012

इस केस में केरल हाई कोर्ट ने अपने पाइन्‍ट नम्‍बर 6 में लिखा है कि-

"Hindu Marriage Act is not applicable to the members of the Scheduled Tribe as per Section 2(2) of the Hindu Marriage Act. If that be so, the directions issued by the Family Court under Section 9 of the Hindu Marriage Act is not applicable to the appellant."

अर्थात हिन्‍दु विवाह अधिनियम के सेक्‍सन 2(2) के तहत हिन्‍दु विवाह अधिनियम अनुसूचित जनजााति के लाेगों पर लागु नही होते है।

 

...The tribal people observe their festivals, which have no direct conflict with any religion, and they conduct marriage among them according to their tribal custom.

They have their own way of life to maintain all privileges in matters connected with marriage and succession, according to their customary tribal faith.

पूरा केस यहां देखे - https://indiankanoon.org/doc/115269110/

 

(4) Supreme Court of India

Madhu Kishwar & Ors. Etc vs State Of Bihar & Ors on 17 April, 1996

Equivalent citations: 1996 AIR 1864, 1996 SCC (5) 125
Author: K Ramaswamy
Bench: Ramaswamy, K.

इस रिट प्रिटिशन में सुप्रिम कोर्ट ने अपने पाइन्‍ट नम्‍बर 3 में लिखा है कि-

In "Law Enforcement in Tribal Areas" by S.K. Ghosh, Director, Law Institute, Calcutta, published by Ashish Publishing House at page 89 it is stated that though the Hindu Succession Act 1956 Hindu marriage Act 1954, Hindu Adoption and Maintenance Act 1956 did not apply, because of their contracts with other advanced societies some changes have taken place among tribes in the observance of marriage, divorce, etc.

पूरा केस यहां देखे - https://indiankanoon.org/doc/450953/

 

(5) Supreme Court of India

Dr.Surajmani Stella Kujur vs Durga Charan Hansdah & Anr on 14 February, 2001

Author: Sethi
Bench: K.T.Thomas, R.P.Sethi
CASE NO.:
Appeal (crl.) 186  of  2001
Special Leave Petition (crl.)	2436	 of  2000

इस में सुप्रिम कोर्ट ने लिखा है कि-

It is conceded even by the appellant that "the parties to the petition are two Tribals, who otherwise profess Hinduism, but their marriage being out of the purview of Hindu Marriage Act, 1955 in light of Section 2(2) of the Act, are thus governed only by their Santal Customs and usage".

पूरा केस यहां देखे -https://indiankanoon.org/doc/102336/

 

(6) Gujarat High Court

Circulate Among The Judicial ... vs State Of Gujarat & on 5 November, 2015

R/CR.MA/14361/2010                                           
CAV JUDGMENT
IN THE HIGH COURT OF GUJARAT AT AHMEDABAD
CRIMINAL MISC. APPLICATION NO. 14361 of 2010
With
SPECIAL CRIMINAL APPLICATION NO. 106 of 2010

"The anti­bigamy provisions of the Indian Penal Code would not  apply   also   to   the   tribal   men   and   women   if   their   customary   law   and  practice   does   not   treat   their   plural   marriages   as   void."

पूरा केस यहां देखे - https://indiankanoon.org/doc/69991249/

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Reference of websites

https://en.wikipedia.org/wiki/2011_Census_of_India

http://www.censusindia.gov.in/2011census/C-01/DDW00C-01%20MDDS.XLS

http://www.iipsenvis.nic.in/Home.aspx

http://www.yourarticlelibrary.com/population/tribal-population-in-india-...

https://www.quora.com/How-much-of-the-population-of-India-belongs-to-a-c...

http://dspace.gipe.ac.in/xmlui/handle/10973/18966

 

न्‍यायालय के फैसलों के अनुसार आदिवासी हिन्‍दु नही है।

Comments

बहुत कुछ सत्य लिखा जाये

Jy aadivasi

आदिवासियों को अपना मालिकाना -मुलवासी होने हक अधिकार मिले भारत का मालिक आदिवासी ही है यह हक अधिकार कायम रखे ! मालिक कि तरह जिने की ताकत रखे ! जय आदिवासी ?@पवन सरपोटा , मडकोला (सागवाडा)

jai Aadiwashi,, !

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virendrasinghdhurwey34611@gmail.com

लडने की शक्ति

जय सेवा

Jay Seva Jay gondwana

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8412890750

Jai adiwasi

दैख भाई अपना खून गरम आदिवासी धरम अपना है
जय मूल निवासी कै कै डामोर

एक तीर एक कमान आदिवासी एक समान
जय आदिवासी

आदिवासी हिन्‍दु नही है

Aadiwasi hindu nhi ye sach he kya reply fast

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Rockpankaj000@gmail

Yan toh kewal Hindu dharam ke upper hi facus kiya gaya hai,aaj bahut sare aadivasi christian dharam ko bhi aapna liya hai.kya in logong ke upper kid dharam ka kayda kanun lagu hoga

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Psingh,imperial.ps@gmail.com

सच या भी है के आदिवासी कभी हिंदू थे नही तो भला कैसे बन सकता हिंदू हमे यह भी सोचना चाहिये के हम लोग अन्य समुदाय के लोगो के विपरीत रिती-रीवाजो को परापारावको अपने हिसाब से होते है जबकी अन्य समुदाय यह समाज नाही पाते कि असल मे वे किस धर्म से आते है?

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dhandedeva@gmail.com

आदिवासी हिन्दू नही । आपका धन्यवाद महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए । मै भाविस पारगी जी को भी लाख जोहार करता हूं ।

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9926071764
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gandhi.ghormare11@gmail.com

Sarna flag me red and white colour ka kya matlab hai? Aur real me sarna flag kaun sa hai?

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8757035848

भाविक जी आप समाज के लिए अमूल्य जानकारी एकत्र कर के हमे जानकारी उपलब्ध करा रहे हो उसके लिए लाख लाख जोहार। प्रकति आपकी हरपल रक्षा करे

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barjot661@gmail.com

hindu na to koi dharm hai na hi us me koi sikhne jaisi ko baat hindu muglo ke aane ke baad hindu dharm bana wo bhi yaha ke logo ko gulam banay rakhne ke liye usne hamare upar hindu sabd ko thopa gaya hai hindu pharsi sabd hai jo muglo ki di hui gaali hai ......choor,daku,lutera,kalana pasnd karte hai to kaho mai hindu hu

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ravidigitalstudio750@gmail.com

अबे गान्डु आदिवासी एक जाती हे जेसे पटेल कलाल लोहार तेली बनिया आदी कोई अलग धर्म नहि हे

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hasmukh.barodiya@gmail. com

Who are you? You don't know who are adiwasi.

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9602460055

Who are 'ADIVASI'? don't try to teach us.Have you forgotten sukma,buster and dantewada? And remember ADIVASI is a not a caste but a class yet every Adivasi is our brother

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9602460055

Who are 'ADIVASI'? don't try to teach us.Have you forgotten sukma,buster and dantewada? And remember ADIVASI is a not a caste but a class yet every Adivasi is our brother

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Ramayan kish dharam ka granth hai. Ramayan ka lekhak
*Valiya bhil(rushivalmiki)
Chamunda maa ki sthapana karne wala * jasha bhil.
Maharana pratap ke senapati
*Rana punja bhil or kai unke sath puri bhilsena
Or mahadev ke upashak bhi bhil
hai to hamara dharam to batayia
Ham bhil kon hai hamara dharam kya hai

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ashishdamor431@gmeil.co

Bhai Hindu dharm ke 4 varno me aadiwasi kisme aata he.
Kisi me bhi nahi. Kyonki aadiwasi Hindu nahi hai. Aur bhi confusion ho to mujhe Milna baap kon hai pata chal jayega.

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lvadera2017@gmail.com

पहली बार हिन्दू शब्द का प्रयोग किस ग्रंथ में किस पेज पर किया गया है?

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Siddhartha1787@gmail.com

yah sari mahtpurn jankaree dene ke liye aapka bahut-bahut dhanwa

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8582066886
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pandu12011997@gmail. com

आदिवासी धर्मी नही धर्म पूर्वी है ओ इस धरती के गोंडवाना भू भाग के मूलनिवासी है ओ प्रकृति धर्म को मानते है और प्रकृति की पूजा करते हैं

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prahladmarabi007@gamil.com

जय जोहर

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Girishroat@gmail.com

Adivace Hindu nahi waha to adivace hi he

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8239707848
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ishwardamor520

जय जोहार
विद्वानों के अनुसार भील शब्द की उत्पत्ति द्रविड़ शब्द ‘बील’ से हुई है जिसका अर्थ है धनुष। धनुष-बाण भीलों का मुख्य शस्त्र था, अतएव ये लोग भील कहलाने लगे। एक दूसरे मत के अनुसार भील भारत की प्राचीनतम जनजाति है। इसकी गणना पुरातन काल में राजवंशों में की जाती थी। जो विहिल नाम से जाना जाता था। इस वंश का शासन पहाड़ी इलाकों में था। आज भी ये लोग मुख्यतः पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। इस संदर्भ में एक कहावत भी प्रचलित है कि संसार में केवल साढ़े तीन राजा ही प्रसिद्ध है इन्द्र राजा, राजा और भील राजा तथा आधे में बींद (दूल्हा राजा)। मेवाड़ की स्थापना के बाद से ही मेवाड़ के महाराणाओं को भील जनजातियों को निरंतर सहयोग मिलता रहा। महाराणा प्रताप इन्हीं लोगों के सहयोग से वर्षों तक मुगल फौजों से लोहा लेते रहे थे। यही कारण है कि उनकी सेवाओं के सम्मान-स्वरूप मेवाड़ के राज्य चिन्ह में एक ओर राजपूत और दूसरी ओर भील दर्शाया जाता था। आमेर के कछावा राजाओं की भांति मेवाड़ के महाराणा भी भीलों के हाथ के अंगूठे के रक्त से अपना राजतिलक करवाते रहे थे। भील जनजाति राजस्थान के सब जिलों में न्यूनाधिक रूप से पाई जाती है। पर राजस्थान के दक्षिणांचल में इनका भारी जमाव है।

जय भील प्रदेश
जय आदिवासी
जय जौहार

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7742340345
e-Mail: 
Dileepkumarmaida345@gmail.com

आदिवासियों का मानव निर्मित व्यवस्था (धर्म,अप्राकृतिक) हिंदू, मुस्लिम ईसाई बोध जेन यहूदी पारसी सिक्ख। के साथ कोई संबंध नहीं है। आदिवासी का धर्म नैसर्गिक (प्राकृतिक, कुदरती) है। जिसका निर्माण किसी मानव ने नहीं किया है।

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7240727887
e-Mail: 
Damornarayan209

बहुत अच्छी जानकारी दिई है ...
आपका बहुत बहुत आभार. ...
जोहार ...

MOBILE NO: 
7350604084
e-Mail: 
a.n.gavit@gmail.com

आज में गर्व से कहता हूँ , की मैं आदीवासी हूँ I यु टूब पर आदिवासी हिंदूनही है I यह सुना और देखा | मेरे जैसे बहुत आदिवासीयों को यह पत्ता नही है की उन्हे क्यों हिंदू बनाया जा रहा है |
महत्त्वपूर्ण जानकारी के लिए मै आपका आभारी हूँ I
जय जोहार , जय आदिवासी I

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e-Mail: 
Srbghan2013@gmail.com

SABHI KO JOHAR-JOHAR

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8461056828

<p>Sabse mukhy baat yh hai ke abhi bahut kusha janna hai or sikhana hai.</p>

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7545048903
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ajaymundri101@gmail.com

adiwasi hindu dheever ko nahi walki sarna dharm ko mante hai .unke anusar ye per paudhe jal jangal aur jamin hi inka devata hai.

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7870446653
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sureshmarandiias@gmail.com

<p>Bahut badiya atical h</p>

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9460977707
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Chetum07@gmail.com

bahut bahut dhanyawad jai sewa jay badadev

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9407165706

अतिउत्तम किया आधुनिक विकास के पथ के सहारे जनजागरण करने हेतु एप्लिकेशन का निर्माण करके सभी आदिवासीओ को जागृत करके एकसूत्र में बांधने की कामयाब कोशिस,प्रकृति आपके साथ रहे

जय आदिवासी समाज की जय हो

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8085000924
7000814691
e-Mail: 
Kirtanamliyar6017@gmail.com

Sir
Aapne itni sari jankariyan diye hain iske liye dhanyawad Aage aur sari jankariyan Aadivasiyon ke liye dete rahiyega vinanti aur ummid Aapse karta hoon
Dhanyawad

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0920455725
e-Mail: 
oraonmahabir@rediffmail.com

<p>aapne jo jankari diye bahut ach laga&nbsp; aage&nbsp; jo bi jankari&nbsp; uplabad&nbsp; ho jankari dete rahe or aadivasi me kitne jati aate hai&nbsp; net me upalabd karae</p>

MOBILE NO: 
9479107571
e-Mail: 
neerajbaghel25691@gmail.com

आप के द्वारा प्रस्तुत जानकारी बहुत अच्छी है। इस प्रकार की जानकारी से हमारे समाज में जगृति जरूर आयेंगी। आपका धन्यवाद!

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9082984003
e-Mail: 
dadinesh32@gmail.com

Aaj desh ko Dharm, jaat, paat k naam par baatne ki koshish ki ja rahi hai, kripaya is jaal mai naa fase. Sabka kalyaan tabhi hoga jab sabhi milkar rahkar education par dhyaan de. Har ek Bharat ka vaasi hamara bhai hai, aaj hum jo bhi hai wo ek dusre ki badolat or sahyog se hi hai.

Aaj desh ko Dharm, jaat, paat k naam par baatne ki koshish ki ja rahi hai, kripaya is jaal mai naa fase. Sabka kalyaan tabhi hoga jab sabhi milkar rahkar education par dhyaan de. Har ek Bharat ka vaasi hamara bhai hai, aaj hum jo bhi hai wo ek dusre ki badolat or sahyog se hi hai.

Dharm ,shiksha or unity se hi ek viksit samaj banta hai. Esme kisi ek ko chor dene se ya enke bare me galat sochne se manaw jati ahankar me jata hai. Unity or shikshit Aatankwadi vi hota hai.
Isliye apna jaati, Dharm or bhasa svi imported hai.
Kyoki apna jaati, Dharm or bhasa kho jane par koi aapko Dionasur v kah sakta hai jo vilupt ho gya...

e-Mail: 
pradeepsoren74@gmail.com

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P d f fiel daalo
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ये अपने आपजो हिन्दू नहीं मानते है तो किसी भी नोकरी के फॉर्म में हिन्दू क्यों भरते हे और st भी
आदिवासी अलग धर्म मान लेते है पर उनके द्वारा लिया जा रहा आरक्षण को भी छोड़ दे तो माने

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