जेलें, जहां 24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे सोते हैं आदिवासी

छत्तीसगढ़ की जेलें निर्दोष आदिवासियों से भरी हुई है
कुछ जेलों में तो हालत यह है कि आदिवासियों को सोने के लिए जगह नहीं है 
वह 2 घंटे की शिफ्ट में ही सो पाते हैं
24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे उन्हें सोने के लिए मिलता है 

पहले एक शिफ्ट सोती है 
2 घंटे बाद उसे उठा दिया जाता है 
और फिर दूसरी शिफ्ट में लोग सोते हैं 
फिर 2 घंटे बाद उन्हें उठा दिया जाता है
इस तरह 8 घंटे की रात में आदिवासी 2 घंटे ही सो पाते हैं 

मैंने कहा निर्दोष आदिवासी 
और इसका सबूत है अभी खुद पुलिस के एक गवाह ने सामने आकर कहा है 
कि वह पुलिस के लिए अदालत में फर्जी गवाहियां देता है 
असल में छत्तीसगढ़ में पुलिस का मुख्य काम इस समय जमीन छीनने का विरोध करने वाले आदिवासियों को जेलों में ठूंसना है 

पुलिस निर्दोष लोगों को पकड़ती है 
फर्जी मुकदमे लगाती है और फर्जी गवाह खड़े करके फर्जी केस खड़ा करती है 
सोमेश पाणिग्रही ने हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार रितेश मिश्रा को खुद बताया है 
कि मैंने पुलिस के लिए करीब 300 केसों में झूठी गवाही दी है
पुलिस वालों ने उससे झूठा वादा किया हुआ है कि वह सोमेश पाणिग्रही की सरकारी नौकरी लगवा देंगे 
यह तो सिर्फ एक ही मामला सामने आया है 
पुलिस के पास तो इस तरह के सैंकड़ों झूठे गवाह हैं 
जो अदालतों में पुलिस के कहने से झूठी गवाही देते हैं 
और निर्दोष लोगों को फर्जी मुकदमे में फंसाते हैं 

सरकार ने सोनी सोरी के ऊपर सात  फर्जी केस लगाए थे 
सातों फर्जी मामलों में गवाहों के पुलिस के सामने तथाकथित बयान बिल्कुल एक जैसे थे
सिर्फ तारीख और जगह का नाम बदला गया था
जिसे पढ़कर कोई भी साफ़-साफ़ समझ सकता था 
कि एक ही समय में बैठकर एक ही व्यक्ति ने एक ही पेन से 7 मुकदमों में बयान लिखे थे 

अगर सरकार का काम निर्दोष नागरिकों को झूठ बोल-बोल कर जेलों में डालना 
गरीब जनता से उनकी संपत्ति उनकी जमीन छीनना
बदमाश धनपशुओं को गरीब जनता की संपत्ति छीन-छीन कर देना ही काम है 
तो एक छुरा मार गुंडे या डाकू और इस सरकार में क्या फर्क है ?
हम कोशिश कर रहे हैं कि संविधान का राज आये और कानून से काम हो 
लेकिन जब हम ऐसी कोशिश करते हैं 

तो सरकार हमें देशद्रोही, विकास विरोधी और नक्सलवादी कहती है 
और गुंडागर्दी करने वाली सरकार खुद को विकास करने वाली और राष्ट्रभक्त बताती है 
इस देश के नौजवानों को यह पूरा खेल समझना ही पड़ेगा
वर्ना यह तंत्र भरभरा कर गिर जायेगा
(हिमांशु कुमार गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रहते हैं।)
 
साभार - http://janchowk.com

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क्या 5 वीं अनुसूची छेत्र में नियंत्रण करने के लिए प्रशाशन को हटा कर अपना प्रशाशन नियंत्रित के लिए अपना स्तर से बहल कर सकते है की नहीं ।

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जब तक आरपार की लड़ाई नहीं लड़ेंगे तब तक हम आदिवासी समाज का यही हाल रहेगा।हमारे ही लोग नारदमुनि का काम कर रहे हैं।

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