लेख

ब्लड डोनेशन को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट न होने के चलते बहुत से लोगों के मन में ब्लड डोनेशन को लेकर दुविधा बनी रहती है।

क्यों है जरूरी

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हल्दी घाटी के युद्ध 2 1 जून,1 5 7 6 ईस्वी में मुगल बादशाह अकबर के सेनापति कछवाहा मानसिंह और मेवाड रजवाडे के महाराणा प्रताप के बीच हुए प्रसिद्ध युद्ध के बारे में सब जानते हैं.सभी लोग यह भी जानते हैं कि हल्दी घाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की ओर से भील राणा पूँजा भील और उसके भील सिपाहीयों ने भी भाग लिया था....लेकिन कुछ ऐतिहासिक तथ्य ऐसे हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं... [1]. सिसौदिया वंशी महाराणा उदयसिंह (1 5 3 7...1 5 7 2) ने 1 5 4 0 ईस्वी में अपने श्वसुर पाली के सोनगरा अखैराज एवं मेवाड के स्वामिभक्त सामंतो के सहयोग से "बनवीर" को हराकर पैतृक राज्य चित्तौड पर कब्जा किया. [2].

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बहुरंगी संस्कृति एवं सप्तरंगी छ्टा,भीली संस्कृति से समृद्ध भीलों की कर्म स्थली के साथ देश- प्रदेश मे अपनी खास पहचान रखने वाला ''बांसवाड़ा''राजस्थान राज्य के दक्षिण मे तथा ''भील प्रदेश'' के उत्तरी छोर पर स्थित हे । भील प्रदेश के इस जिले के मध्य से सदानीरा माही नदी अपने सुमधुर पावन जल से इसे सिंचित ओर पोषित करती हे तो घोटिया आंबा धाम भील गणवीरो की प्रेरणा स्थली व जन जन की आस्था का केंद्र हे । प्रकृति की यहा ख़ासी मेहरबानी रही हे ओर यह स्थान जितना भील गणवीरो से भरा हे उतना ही प्रकृतिक सोनदारी से भी भरपूर हे।

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दिनांक 13/9/2016 मंगलवार रात्रि को ग्राम चिराखान(लिम्दापुरा) तह मनावर जिला धार(मप्र) में 15-20अज्ञात बदमाशों ने गुलसिंह पिता अनसिंह के घर पर धावा बोल दिया जिसमें बदमाशो ने एक जोड़ी बैल और 15000/-रू नगद चुरा ले गए। बचाव करने पर गुलसिंह और उनकी पत्नी चुन्नीबाई को बदमाशो ने धारदार हथियारों से बुरी तरह से घायल कर दिया। जिन्हें बैहोशी की हालत में मनावर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। गाँव वालों ने बैलो को छुडवा लिए चोर नगद रू 15000/-लेकर फरार हो गए । गुलसिंह भाई बहुत गरीब हैं उनके घर में खाने के लिए अनाज तक नहीं हैं। उनका जीवन मजदूरी और लकड़ी बैचकर चल रहा है।

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हर कोई चाहता है की उसके गांव में जो समस्या है,वह दूर हो जाए ताकि वह अपना जीवन ख़ुशी ख़ुशी बिता पाए | मित्रो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कोई किसी के लिए नहीं सोचता | बस हर कोई अपनी लाइफ को बेहतर से बेहतर बनाने की कोशिश में लगे रहते है |जीवन के हर मोड़ पर एक नया रास्ता हमे नजर आता है | उसी मार्ग से हमे गुजरना होता है,पर कुछ लोग समझ जाते है की रास्ते में कई रुकावट आएगी, पर मुझे अपनी मंजिल तक पहुँच ही जाना है | दोस्तों आज १४ सितम्बर का दिन है यानी की आप सभी जानते है आज विश्व हिंदी दिवस है | मुझे भी पता था जब मैं अपने दोस्तों से आज के विषय की चर्चा करने बैठा | मुझे ऐसा लग रहा था की हिंदी की चर्चा... more

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" प्रकृति पूजक संस्कृति रक्षक आदि आनादिकाल वासी आदिवासी मूल वासी "

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प्यार एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में हर कोई व्यक्ति बहुत कुछ सोचता है | बहुत से लोग कहते है की प्यार का होना ही हमारे जीवन का होना माना जाता है | बिना प्यार की जिंदगी कुछ भी नहीं होती जैसे जेब में नॉट नहीं तो कुछ भी नही की तरह | वैसे हर कोई प्यार के बारे में जो सोचता है वो उनके अनुरूप सही है | क्योंकि कोई गलत नही होता और कोई सही नहीं होता,परन्तु बिना हार के जीत भी तो नही होती | जब भी अपने दोस्तों से में किसी मुद्दे पर या किसी विषय पर चर्चा करता हूँ,तो कई तरह के अच्छे और बुरे दोनों विचार मुझे जानने को मिलते है | इस बार जब मैं प्यार के बारे में अपने दोस्तों से चर्चा कर रहा था तो मेरे एक मित्र... more

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आदिवासियों के लिए देवता है आजादी के सेनानी टंट्या भील

देश में आजादी की पहली लड़ाई यानी 1857 के विद्रोह में जिन अनेक देशभक्तों ने कुर्बानियां दी थी, उन्हीं में से एक मुख्य नाम है आदिवासी टंट्या मामा। आजादी के इतिहास में उनका जिक्र भले ही ज्यादा न हो मगर वह मध्य प्रदेश में मालवा और निमाड़ अंचल के आदिवासियों के लिए आज भी किसी देवता से कम नहीं हैं। 

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भारत के लगभग 20% भूभाग में 600 से भी अधिक आदिवासियों जिनकी संख्या 10 करोड़ है भारत के कुल जनसंख्या का सिर्फ 8% ही है। पूर्वकाल से आदिवासियों का अपने प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण अधिकार था। लेकिन आधुनिक युग की शुरुवात के पूर्व जब भारत में कई विदेशी आक्रमणकारी लोगो का प्रवेश होना शुरू हुआ तो इससे यहाँ के आदिवासी समुदाय के जनजीवन में कोई फर्क नहीं पड़ा क्योकि वे आक्रमणकारी लोग इन आदिवासियों के क्षेत्रो में प्रवेश नहीं किया था। हुन , मंगोल और मुगलो का भारत में बार बार आक्रमण करने का मुख्य मकसद सिर्फ कीमती चीजो जैसे सोना आदि को लूटना था। मुगलो ने भारत में 1526-1857 तक लंबा शासन कायम किये। लेकिन जब... more

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विश्व आदिवासी दिवस, हैं त्योहार इसे मनाया जाना होगा।

बाधाओं को तोड़कर,घटाओं को रोककर जाना होगा।

हो न हो छाता बरसाती,बरसते पानी कीचड़ में से जाना होगा।

विश्व आदिवासी दिवस, हैं त्योहार इसे मनाया जाना होगा।

एक तीर एक कमान सभी आदिवासी एक समान गीत गाना होगा।

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