लेख

भारत में समय-समय पर विभिन्‍न राज्‍यों की हाईकोर्ट ने अपने महत्‍वपूर्ण निर्णयों में साबित किया है कि आदिवास‍ियों पर हिन्‍दु विवाह अधिनियम 1955 लागु नही होता है।

क्‍यों लागु नही होता है ? सोचने की बात है।

क्‍या आदिवासी हिन्‍दु नही है ? नहीं है।

इसलिये तो हिन्‍दु विवाह अधिनियम आदिवासी पर लागु नही होता है।

आइये देखते है कुछ केस -

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KOHAKA

टिटनेस रोग के इलाज के लिए वेक्सीन की खोज 1890 में जर्मन के एक वैज्ञानिक समूह ने की थी,जिसका नेतृत्व एमिल वॉन बेहरिंग ने किया था #टिटनस के टीके की खोज सन् 1890 मे करने से पूर्व दुनिया भर मे सम्राज्यवादी युद्ध और अराजक धर्मयुद्ध के दौरान होने वाले घायलो के लिए "चोटिल होना" भी एक महामारी की तरह थी इसने करोड़ो मानवो की जान ले ली थी. .... वही दुसरी ओर दुनिया के प्राकृतिक क्षेत्रो के रखवाले "कोयतुर" आदिवासी मानवो ने ..... #टिटनेस के टीके की खोज से हजारो वर्ष पूर्व ही इस महामारी से बचने की जबरदस्त तकनीकी विकसित कर ली थी .....

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5TH SCHEDULE OF INDIAN COSNTITUTUON

*पाँचवी-अनुसूचि आदिवासियों के लिए संजीवनी बूटी के समान क्यों है..!! इसे समझना क्यों जरूरी है*..? =====================भारतीय संविधान मे भाग 10 में अनुसूचित और जनजाति क्षेत्रों के बारे उल्ल्खित हैं. और पॉचवी अनुसूची में "अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उपबंध हैं .संविधान के अनुच्छेद 244(1) में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए व्यवस्था की गई हैं.! मतलब पाँचवी अनुसूचि के अंतर्गत धारा 244(1) के तहत अनुसूचित क्षेत्रो में सिर्फ आदिवासिओ का ही राज चलेगा..!! पांचवीं अनुसूची के तहत मिलने वाली सुविधाओं को बहुत ही सरल शब्दों में आप सभी को समझाने का प्रयास..?

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दुनिया की 6000 आधुनिक भाषाएं स्टोन एज की एक ही अफ्रीकन आदिवासी भाषा से विकसित हुई हैं. अंग्रेजी से लेकर चीनी और संस्कृत तक. दुनिया भर की यह जननी भाषा 50 से 70 हजार साल पहले अस्तित्व में आई थी. यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड, न्यूजीलैंड के विकासवादी मनोविज्ञानी शोधकर्ता क्वेंटिन एटकिंसन ने यह दावा विश्व की 504 भाषाओं के शब्दों, ध्वनियां और उनके टोन के आधार पर किया है. उनका यह शोध जब 2011 में साइंस जरनल में प्रकाशित हुआ तो दुनियाभर के भाषाविदों और वैज्ञानिकों में खलबली मच गई क्योंकि अब तक यही माना जाता रहा था कि भाषाएं अलग-अलग इलाकों में स्वतंत्र ढंग से विकसित हुई हैं.

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127 वर्ष पुराना जनजातीय हिजला मेला और आदिवासी वाद् यंत्र सकवा :
सकवा दो बोंगा आड़ग काना....
संताल आदिवासी में मान्यता है कि सकवा वाद् यंत्र में बोंगा (भगवान) वास करते है.यह बोंगा का आवाज है.इससे बोंगा खुश होते है .यह भैस के सिंग का होता है.सिन्दरा,बाहा आदि धार्मिक अनुष्ठान में इसका प्रयोग किया जाता है.
इसके साथ साथ सिंगघ(मुड़ा रहता है),मदानभेड़(जो सीधा होता है ) शादी आदि में बजाय जाता है.

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गोंडवाना सेना ने अंग्रेजो से युध्द किया था । भारत के आजादी की लडाई मे अंग्रेजो को मुहतोड जबाब दिया था ।

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AADIVASI

विकास से विस्थापन आदिवासियों का पलायन और विस्थापन सदियों से होता रहा है और ये आज भी जारी है। आदिवासियों के जंगलों, जमीनों, गाँवों, संसाधनों पर कब्जा कर उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर करने के पीछे मुख्य कारण हमारी सरकारी व्यवस्था रही है। वे केवल अपने जंगलों, संसाधनों या गाँवों से ही बेदखल नहीं हुए बल्कि मूल्यों, नैतिक अवधारणाओं, जीवन-शैलियों, भाषाओं एवं संस्कृति से भी वे बेदखल कर दिए गए हैं। हमारे मौलिक सिद्धान्तों के अन्तर्गत सभी को विकास का समान अधिकार है। लेकिन आजादी के बाद के पहले पाँच वर्षों में लगभग ढाई-लाख लोगों में से 25 प्रतिशत आदिवासियों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा। विकास के नाम... more

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इस पृथ्वी के जल आकाश और भूमि के सभी प्राणियों में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो सबसे विकसित और संगठित सामाजिक समूह में रहने वाला और नए चीजो को सृजन करने की क्षमता रखता है। ज्ञान बुद्धि , समझ , भावना , प्रेम , क्रोध , घृणा , द्वेष जैसे मानवीय विशेषताओं से भरा हुआ मनुष्य 'प्राणी जगत' में मनुष्य द्वारा सृजन करने की अदभुत क्षमता के कारण ही मनुष्य को इस पृथ्वी में अनूठा प्राणी बनाता है।

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Jaypal Singh Munda

जयपाल सिंह मुंडा झारखंड आंदोलन के एक प्रमुख नेता थे। जयपाल एक जाने माने हॉकी खिलाडी भी थे । उनकी कप्तानी में भारत ने १९२८ के ओलिंपिक में भारत ने पहला स्वर्ण पदक प्राप्त किया।इन्होंने... more

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