लेख

अनुसूचित जिलों में पदास्थापित सभी O.I.G.S अधिकारी/पदाधिकारी असंवैधानिक हैं...
RTI में हुआ अब तक का सबसे बड़ा खुलासा

राज्यपाल ने माना अनुसूचित क्षेत्रो में कार्यपालिका असंवैधानिक है

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मैं उड़ना चाहती हूँ,मैं जीना चाहती हूँ अपनी जिंदगी
क्यों रोका है मुझे अपने ही घर के लोगो ने
क्यों मैं उड़ नही सकती,क्यों मैं घूम नही सकती,
क्यों मैं जॉब नही कर सकती,
क्यों मैं अपने सपनो को पूरा नही कर सकती.
क्यों मुझे रोकते है, क्यों मुझे टोकते है,
जब पापा के घर थी तब भी आजाद नही थी,
अब पति के घर भी आजादी नहीं,
क्यों मुझे आजादी नही,क्यों मैं जी नही सकती,
क्यों मेरी कोई सुनता नहीं,
क्यों पति भी अपनी माँ का होता है,
मैं नही कहती माँ की बात न सुने पर मैं भी तो अपना घर छोड़ आई हूँ,
मुझे भी प्यार चाहिए,मुझे भी साथ चाहिए,

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कोटड़ा तहसीलो की स्कूलों में शिक्षको की पूर्ण रूप से भर्ती के लिए
कई बार शिक्षा विभाग और राजस्थान सरकार से निवेदन करने के बावजूद भी अभीतक ये कार्रवाई
शिक्षा विभाग और सरकार के बीच भी कई की तरह अनबन
सरकार को नही पता किस id पर भेजनी थी शिकायत
शिक्षा विभाग ने दिए सरकार को निर्देश

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आज भारत 70 वर्षो से जिस लोकतंत्र का अनुसरण कर रहा है उसे ‘प्रतिनिधि लोकतंत्र’ Representative Democracy कहते है। इसमे देश की जनता सीधे अपना प्रतिनिधि चुन सकते है। जन- प्रतिनिधि किसी जिले या संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है । जनता द्वारा ‘प्रतिनिधि’ Representative चुनने के कई मुद्दे हो सकते है, यह तो जनता खुद निर्णय करती है।

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साथियो आज विश्व उपभोक्ता दिवस है |जिसकी शुरुआत आज के ही दिन यानि 15 मार्च 1962 मैं हुई थी | यह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी द्वारा की गई एक ऐतिहासिक घोषणा थी जिसमे उन्होंने कहा था की उपभोक्ता को ये अधिकार है|जिसमें चार मूलभूत अधिकार बताए गए हैं । सुरक्षा का अधिकार,सूचना पाने का अधिकार,चुनने का अधिकार,सुने जाने का अधिकार | उपभोक्ता अर्थात हम लोग कोई सामान किसी दुकान से खरीद कर उसका उपयोग करते है उसे उपभोक्ता कहते है | साथियो कई बार हम सामान खरीदते समय वस्तु का वजन नहीं करवाते,कभी कभी तो कीमत देखते है पर कभी नही देखते और उसकी तारीख देखना की ये कब बना है | वो भी नही करते,लेकिन... more

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उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील की कई स्कूलों में शिक्षको की कमी है | इसके लिए कोटड़ा तहसील में एक युवा टीम ने इसके लिए कुल 11 स्कूल की एप्लिकेशन उपखंड अधिकारी के नाम से कोटड़ा उपखंड कार्यालय में 29 अगस्त 2016 को दी थी | उपखण्ड अधिकारी के अनुपस्थित में तहसीदार ने कहा की इसे हम जल्दी ही उदयपुर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे |लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई |
स्कूलों की सूचि
1.राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कुकावास
2.राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय झेड
3.राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मांडवा
4.राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खजुरिया

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होली का अर्थ हे हो लेना , हो जाये। जैसे हो जाय दो दो हाथ। हो जाय एक मैच। हो जाय एक बाजी। मतलब गैर आदिवासियो के साथ युद्ध हो लेने या हो जाने से हे। गैर हथियारों के साथ डंडो के साथ प्राचीन युद्ध के मारक ढोल के साथ वीरता भरे उत्साह के साथ नाचते गाते हुए किया जाता हे जो भी युद्ध का प्रतीक हे। राड का अर्थ भी युद्ध या शत्रुता होता हे जो आदिवासी युद्धाओ के गढ़ या दुर्ग भेदन के युद्ध की परम्परा का प्रतीक हे। ये सभी अर्थ आर्यो या विदेशियो के साथ प्राचीनकाल में हुए युद्धों के प्रतीक हे। डोहा और डोही को जलाने की परंपरा आर्यो के साथ युद्ध में मारे गए शहीद हुए आदिवासी योद्धाओ और और वीरांगनाओ को सामूहिक... more

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*आदिवासी महिलाओं को सल्युट**8 मार्च,जागतिक महिला दिन
इस कुदरती पृथ्वी पर बहोतसे देश बनाये गये है।
कोई देश विकसीत है तो कोई देश आज भी विकसनशील है।
भारत भी विकसनशील देशों की सूची में ही शामिल है।
इसी विकसनशील देश में विकास के नाम पर हर पांच साल बाद राजनीती की जाती है।
देश की जनता को नये नये लुभावने लॉलिपॉप्स दिये जाते है लेकिन विकास का लॉलीपॉप रॅपर में ही बंद रहता है।

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महिला दिवस पर खास पेशकश
महिला दिवस पर खास कुछ चुनिदा मेरे संपर्क में जो महिला थी उनसे जाने उनके विचार,वे क्या अपेक्षा रखते है मुझसे | जो आपके बिच रख रहा हूँ |
आप भी जानिये आपसे जुडी उस हर महिला कि सोच जो आपसे कुछ अपेक्षा रखती है |
और ये भी कोशिश कीजिये कि क्या आप उनकी अपेक्षा पूरी कर पा रहे है,अगर नही तो कैसे करेंगे | यहाँ जरूर बताये |

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5TH SCHEDULE OF INDIAN COSNTITUTUON

संविधान की “पाँचवी और छठवीं अनुसूची” 'अनुसूचित जनजाति'  के लिये किसी “धर्मग्रंथ” से कम नही है । क्योंकि 'अनुसूचित जनजाति'  के सुरक्षा और हित की तरफदारी इन्ही कानूनो मे निहित था । “पाँचवी और छठवीं अनुसूची” संविधान की पुस्तक मे “शव्दो” के रूप मे सत्तर वर्षों से कैद पड़ा है जिसे आजतक 'अनुसूचित क्षेत्र' Schedule Area के लोगो ने उसका स्वाद नही चखा । आज भी 'अनुसूचित जनजाति' Schedule Tribe अपने संविधान पर पूर्ण आस्था और श्रद्धा रखता आया है । लेकिन अब उनका सब्र टूटता नज़र आ रहा है ।

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