लेख

झारखंड के अनुसूचित क्षेत्र (पाँचवी अनुसूची क्षेत्र )के जनजाति समुदाय अपने क्षेत्र मे पारम्परिक रूढ़िगत ग्रामसभा और मांझी बाबा के सहमति से अगर पत्थर गाड़ते है तो किसी राजनीतिक दल को क्या अधिकार है की ग्रामीण जनजातियों को अपने ही निज क्षेत्र मे पत्थर जाने पर उन्हें ' राष्ट्र विरोधी' गतिविधि कह कर बदनाम करे ।

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'झारखण्ड प्रदेश' जिसकी कल्पना देश की आजादी के पूर्व एक 'जनजाति बहुल प्रदेश' के रूप मे किया गया था । इस प्रदेश में लगभग 33 से भी ज्यादा जनजाति समुदायों का निवास सदियों से रहा है। मुख्यतः जनजाति समुदाय झारखण्ड के आंचलिक एवम वन प्रदेशो में निवास करते है और इनका जनजीवन बहुत ही सरल है। खेती इनका मुख्य पेशा है लेकिन इनका जीवन जंगलों पर भी आश्रित थे ।

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आज से 725साल पहले डूंगरपुर ''राज' भील प्रदेश "डुन्गर नू घेर" या "पाल" से जाना जाता था। यहा भील आदिवासीयो की तमाम पालो के गमेती ने राजा डुगर को नियुक्त किया था। खुशहाल आदिवासी राज था। उसी समय मे एक बनिया व्यापार करने के लिये शालासाह थाना गाव आया उसकी एक खूबसूरत कन्या थी। राजा ने उससे विवाह का प्रस्ताव भेजा। बनिया मान गया पर उसने आसपुर-बडोदा के ठीकाने के सामन्तवाद राजपुत से मिलकर भीलराजा को मारने का षडयंत्र रचा। इसी शुक्लदशमी सवन्त 1336 के दिन शादी तय थी राजा बरात लेकर पहुचे।

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पूरे भारत में एकमात्र समुदाय है जो विश्‍व स्‍तर पर अपना दिवस मनाता है और वो है - आदिवासी।

जी हां दोस्‍तों,

आदिवासी का महापर्व - विश्‍व आदिवासी दिवस।

विश्‍व आदिवासी दिवस क्‍या है

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मानो या ना मानो यह पूर्णतया सत्य है।देर से कटी प्याज का कभी उ पयोग ना करें।प्याज हमेशा तुरंत काट कर खाएं।
कटी रखी प्याज दस मिनिट में अपने आस पास के सारे कीटाणु अवसोशित कर लेती है।
यह वेज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है।
जब भी किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप फैले घर में सुबह शाम हर कमरें में प्याज काट कर रख दें।
बाद में उसे फैंक दें।सुरक्षित बने रहेंगें।

"प्याज "के संबध में महत्वपूर्ण जानकारी -अवश्य पढ़े

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"जो कौम अपना इतिहास नही जानती, वो जल्‍द ही खत्‍म हो जाती है।"

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आदिवासी सामाजिक दर्शन

हमारी पावन धरती और इस धरती के हज़ारो रंग और उसकी प्राकृतिक सौंदर्य सबको अपनी ओर  खीचती है वैसे ही आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परम्परा और जनजीवन प्रकृति के बहुरंगी आयामों से भरा हुआ है। आदिवासी समाज  ‘सम्प्रदाय’ पूरक नहीं बल्कि ‘समुदाय’ पूरक समाज  है।

 

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