लेख

सोयाबीन की वह फसल याद आती हैं, जब.........बरसात। ~~~~~~~~~~~~~~~~ यह तो केवल एक काल्पनिक कहानी हैं हकीकत कहीं इससे भी ज्यादा हैं। यह कहानी समाज के उस व्यक्ति को समर्पित हैं जिसको इससे गुजरना पड़ा। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्ति पर हैं। मैं गाँव से शहर पढ़ाई के लिए जाने वाला हूँ। पिताजी के पास तीन बीघा जमीन के अलावा और आय का साधन नहीं था। इसलिए गाँव के ही पटेल से रुपये लाकर मेरे हाथों में थमाते हुए आश्वस्त किया कि अब तुम शहर में पढ़ाई अच्छी सी करना हमारी बिलकुल बिखर मत करना। हम यहाँ पर सब व्यवस्थित कर लेंगे। अबकी बार चना और मक्का के स्थान पर सोयाबीन की बुवाई करेंगे देखना हमारा सारा कर्जा उतर... more

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आदिवासी समाज में भी वित्तीय प्रबंधन (कार्यआयोजना) के क्रियान्वयन की पहल की जा सकती हैं। ~~~~~~~~~~~~~~~~ यह बात कितनी अजीब सी हैं।  आदिवासी समाज में वित्तीय प्रबंधन। यह तो हास्यास्पद और कल्पनाओं पर आधारित हैं। इस बात पर कौन गोर कर सकता हैं। यही बात हमारे आदिवासी समाज में धरातल पर कहीं जा सकती हैं जब आप वित्तीय प्रबंधन की बात करेंगे। मगर हम जो शुरुआत करने जा रहे हैं वह अभी क्रियान्वयन में नहीं हैं। मैं शब्दों के माध्यम से हकीकत बयाँ करना चाहता हूँ। यह बात कल्पनातित अवश्य हैं। यथार्थ का दृश्याकंन भी हैं। आज के प्रौद्योगिकी युग में जहाँ भौतिक उन्नति की संभावनाएँ अपार हैं। वहीं आदिवासी समाज के... more

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शिक्षा के लिए आईये, सेवा के लिए जाईये। चलो चलें स्कूल हम।

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रत्न,रतन अथवा हीरा ये कोई वस्तु नहीं हैं, बल्कि अनमोल आभूषण हैं, जिनकी कीमत हर कोई नहीं लगा सकता हैं और न ही बाजार में सार्वजनिक स्थलों की बिकाऊ चीजें हैं। कहने का मतलब मेरा यही हैं कि "जिसकी सोच गहराई तक जाती हो और कुछ ऐसा छोड़ जाए की हर व्यक्ति सोचने पर मजबूर हो जायें "   यही कार्य "जय आदिवासी युवा शक्ति" और "जय आदिवासी भील युवा संगठन" अपने आदिवासी समाज में युवाओं को संगठित करने के लिए डॉ हीरा अलावाजी और श्री जितेन्द्रकुमार राणाजी कर रहे हैं।     

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आदिवासी समाज के युवा तीरन्‍दाज श्री वकिलराज डिन्‍डोर ने समाज का गौरव बढाया है। बांसवाडा के नापला गांव के रहने वाले वकिल का World Championship में चयन हुआ है, जिसमें वे भारत की राष्‍टीय टीम का प्रतिनिधित्‍व करेगें।

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पुरे विश्व में आदीवासियो सा अनुभव धन धान्य वीरता मन जैसा किसी का नही है । वर्तमान परिवेश में आदिवासी युवा वर्ग भी कि...सी से कम नही है ।
लगन मेहनत का जीता जगता उदहारण आदिवासी समुदाय है।पहले भी राजा महाराजा हुआ करते थे ।
• मुख्य बिंदु पर प्रकाश डालने पर आदिवासी इतिहास पढ़ने पर पुराने गढ़ किला बुजुर्ग द्वार ताल खेत पहाड़ पत्थर देखने पर सब आदिवासियों के रजवाड़े का बखान करते है ।भारत देश में ही समस्त राज्यो में आदिवासियों ने अपना इतिहास छोड़ दिया है। जो वर्तमान में युवा आदिवासी वर्ग देख रही है।

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