लेख

छत्तीसगढ़ की जेलें निर्दोष आदिवासियों से भरी हुई है
कुछ जेलों में तो हालत यह है कि आदिवासियों को सोने के लिए जगह नहीं है 
वह 2 घंटे की शिफ्ट में ही सो पाते हैं
24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे उन्हें सोने के लिए मिलता है 

पहले एक शिफ्ट सोती है 
2 घंटे बाद उसे उठा दिया जाता है 
और फिर दूसरी शिफ्ट में लोग सोते हैं 
फिर 2 घंटे बाद उन्हें उठा दिया जाता है
इस तरह 8 घंटे की रात में आदिवासी 2 घंटे ही सो पाते हैं 

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रीत-रूढ़ि से जुड़ा एक और ख़ास मौका आ रहा हे पढ़े लिखें सगाजनो **उतरण**यानि उत्तरायण=मकर सक्रांति अपनी अपनी रूढ़िगत ग्रामसभाओं में कैसे मनाया जाता हे इस पर आज चर्चा डिस्कस हो जाये

वैसे बता दू हमारे यहाँ फोटो में दर्शाये(कृष्ण खगा) पक्षी दिवी को पकड़ घरों में घूमा जाता हे जिससे ढ़ेर सारा अनाज रुपये एकत्र होते हे
एकत्रित धान को थोड़ा बहुत बेच कर धूणी मतई ऑवन के लिए नारियल व प्रसाद के रूप में खजूर तथा चवाणे को लाया जाता हे और थोड़ा अनाज धान को बाकळा,लपसी एव चावळ के लिये रखा जाता हे जो शाम को उतरण वळवनी के वक्त सभी मिलकर बना कर खाते हे

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संदेह पैदा क्यों न हो दुनिया में, संदेह पैदा होता है, झूठी श्रद्धा थोप देने के कारण। छोटा बच्चा है, तुम कहते हो मंदिर चलो। छोटा बच्चा पुछता है किस लिए?
अभी मैं खेल रहा हूं, तुम कहते हो, मंदिर में और ज्यादा आनंद आएगा।

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हम आदिवासियों के जीवन में इतना दुख है, इतनी पीड़ा, इतना तनाव कि ऐसा मालूम पड़ता है कि शायद पशु भी हमसे ज्यादा आनंद में होंगे, ज्यादा शांति में होंगे। समुद्र और पृथ्वी भी शायद हमसे ज्यादा प्रफुल्लित हैं। रद्दी से रद्दी जमीन में भी फूल खिलते हैं। गंदे से गंदे सागर में भी लहरें आती हैं--खुशी की, आनंद की। लेकिन आदिवासी के जीवन में न फूल खिलते हैं, न आनंद की कोई लहरें आती हैं।

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The Tribes Advisory Councils have been constituted in the Scheduled Areas States i.e. Andhra Pradesh, Chhattisgarh, Gujarat, Jharkhand, Himachal Pradesh, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odisha and Rajasthan and non Scheduled Areas States of Tamil Nadu and West Bengal. The directions of the Hon’ble President have been conveyed to the State Government of Uttarakhand for constitution of Tribes Advisory Council in the State.

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राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की लोक संस्कृतियों का त्रिवेणी संगम वागड लोक परम्पराओं, सांस्कृतिक रसों और जन-जीवन के इन्द्रधनुषी रंगों से भरा-पूरा वह अँचल है जहाँ लोक जागरण, समाज सुधार और स्वातंत्र्य चेतना की त्रिवेणी प्रवाहित होती रही है। आर्थिक,सामाजिक व शैक्षिक दृष्टि से भले ही इस जनजाति बहुल दक्षिणाँचल को पिछडा माना जाता रहा हो मगर आत्म स्वाभिमान की दृष्टि से यह क्षेत्र कभी उन्नीस नहीं रहा । आत्म गौरव की रक्षा के निमित्त प्राणोत्सर्ग करने का जज्बा इस क्षेत्र की माटी में हमेशा से रहा है । इसी का ज्वलन्त उदाहरण है- मानगढ धाम ।

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मुझे यह बात बड़ा अजीब लगता है की महानगरों में प्रदूषण का स्तर जिस तरह से बढ़ा है की अब तो सभी लोगों को मास्क लगातें हुये देखना अब आम बात हो गई है ।

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गोर्रा कोयतोरिन समाज का पवित्र_खाद्य_फसल है। जोकि गोर्रा गोण्डवाना के पवित्र “गो” से गोर्रा (रागी (वैज्ञानिक नाम - इल्युसिन कोरकाना, परिवार- धान्य),माड़िया - (जब हमे असभ्य #आर्य बहारी दिकू लोग, #हम_सभ्य_आदिवासियों को असभ्य और माड़िया बोले तब से रागी को “मड़िया, मडिया” बोला गया।) गोर्रा का खोज मेरे महान पुरखो द्वारा जो #गोडूम_दिप्पा ( गोण्डवाना के पवित्र “गो” से गोडूम दिप्पा ( मरहान, टिकरा,) में गोर्रा की पवित्र खेती की जाती है।

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सोनी सोरी ( छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित जबेली गाँव की एक आदिवासी विद्यालय शिक्षिका हैं।सन् 2011 में पुलिस द्वारा यह इल्जाम लगाया गया कि वे नक्सलियों को सूचनाएं उपलब्ध करवाती हैं। सोनी सोरी को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया और छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया। कोर्ट में पेशी से पहले इन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में रखा गया, जहां छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा उन्हें नंगा किया गया और बिजली के झटके लगाए गए। थर्ड डिग्री टार्चर की वजह से कोर्ट में पहले दिन पेशी के दौरान वे चल भी नहीं पा रहीं थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतंत्र जाँच करवाए जाने पर उनके यौनांग में तीन पत्थर पाए गए। सोनी... more

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असुर भारत में रहने वाली एक प्राचीन आदिवासी समुदाय है। असुर जनसंख्या का घनत्व मुख्यतः झारखण्ड और आंशिक रूप से पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में है। झारखंड में असुर मुख्य रूप से गुमला, लोहरदगा, पलामू और लातेहार जिलों में निवास करते हैं। समाजविज्ञानी के. के. ल्युबा के अनुसार वर्तमान असुर महाभारत कालीन असुर के ही वंशज है। असुर जनजाति के तीन उपवर्ग हैं- बीर असुर, विरजिया असुर एवं अगरिया असुर. बीर उपजाति के विभिन्न नाम हैं, जैसे सोल्का, युथरा, कोल, जाट इत्यादि. विरजिया एक अलग आदिम जनजाति के रूप में अधिसूचित है।
 

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