मां-बाडी डे-केयर केन्‍द्रो एवं मां- केन्‍द्रो का संचालन

यह योजना स्‍वच्‍छ परियेाजना द्वारा वर्तमान में अनुसूचित जनजाति / कथौडी परिवारो के ऐसे बालक / बालिका जो शिक्षा से वंचित है के लिए संचालित की जा रही है। जिला उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाडा, प्रतापगढ, एवं सिरोही क्षेत्र में निवासरत जनजाति समुदाय के बालक बालिकाऐं जो आयुवर्ग 6 से 12 के है जिस क्षेत्र में प्राथमिक श्क्षिा (मां-बाडी केन्‍द्र पर कक्षा पहली एवं चौथी की शिक्षा) हेतु 2 से 5 किमी पैदल चल कर जाना होता है। इस योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य ऐसे बालको को उन्‍ही के फले अथवा गांव में मां- बाडी केन्‍द्र संचालित कर शिक्षा से जोडना है एवं इन समुदाय की महिलाओ में शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य एवं स्‍वच्‍छता संबंधी जागरूकता पैदा करना है। इन मां बाडी केन्‍द्रो में शिक्षाकर्मी का कार्य करने वाले युवक एवं युवती जनजाति समुदाय के होते है। प्रत्‍येक केन्‍द्र पर 30 जनजाति बालक / बालिकाओ को नामांकित कर बच्‍चो को नि:शुल्‍क दोपहर का भोजन एवं एक समय का अल्‍पाहार, गणवेश, पाठ्य सामग्री इत्‍यादि उपलब्‍ध करायी जाती है। जनजाति समुदाय के बालक/ बालिकाओ को शिक्षा की मुख्‍य धारा से जोडना तथा जनजाति परिवारो के बच्‍चो को कुपोषण से मुक्ति दिलाना इस योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य है। वर्तमान में अनुसूचित क्षेत्र में 420 मां-बाडी केन्‍द्र एवं 515 डे-केयर केन्‍द्रों का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही सहरिया क्षेत्र में 324 डे-केयर एवं माडा क्षेत्र में 80 मां-बाडी केन्‍द्रों का संचालन किया जा रहा है।

योजना की अधिक जानकारी के लिये यहां पर क्लिक करें ।
http://www.tad.rajasthan.gov.in/index.php/schemes-hi
साभार
जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग उदयपुर राजस्‍थान

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