आदिवासी परम्‍पराऐं एवं मान्‍यताऐं

उतरण - दिवी (काली चीडी) को तिल खिलने का आदिवासी पर्व

रीत-रूढ़ि से जुड़ा एक और ख़ास मौका आ रहा हे पढ़े लिखें सगाजनो **उतरण**यानि उत्तरायण=मकर सक्रांति अपनी अपनी रूढ़िगत ग्रामसभाओं में कैसे मनाया जाता हे इस पर आज चर्चा डिस्कस हो जाये

सकवा

127 वर्ष पुराना जनजातीय हिजला मेला और आदिवासी वाद् यंत्र सकवा :
सकवा दो बोंगा आड़ग काना....
संताल आदिवासी में मान्यता है कि सकवा वाद् यंत्र में बोंगा (भगवान) वास करते है.यह बोंगा का आवाज है.इससे बोंगा खुश होते है .यह भैस के सिंग का होता है.सिन्दरा,बाहा आदि धार्मिक अनुष्ठान में इसका प्रयोग किया जाता है.

तीर- धनुष आदिवासी समाज का धरोहर है

तीर- धनुष आदिवासी समाज का हथियार नहीं बल्कि उस समाज का धार्मिक, सांस्कृतिक एंव सामाजिक पहचान हैं!!

क्या आदिवासी समाज में मृत्यु भोज का आयोजन करना उचित हैं ?

क्या आदिवासी समाज में मृत्यु भोज का आयोजन करना उचित हैं ?आदिवासी समाज वैसे ही आर्थिक स्थिति से बेहद कमजोर हैं, और ऐसे में खर्चिले आयोजन करना समाज को पतन की ओर ले जाना माना जा सकता हैं।

खाखलिया बावसी - भील पूर्वजों के थानक

आदिवासी गांवों में हर गांव के किनारे हमें प्राय: सर्पाका आक़ति से मढी हुई अनेक मूर्तियां दिखाई देती है। आदिवासी समाज में यह खाखलिया बावसी के नाम से जानी जाती है। समाज मे परिवार के पूर्वजों के देहान्ता के उपरान्तम उनकी याद में इन मूर्तियों का निर्माण किया जाता है।