विश्व आदिवासी दिवस फूहडता नहीं बल्कि पर्यावरण और मानव सुरक्षा के प्रति देता संदेश हैं

आदिवासी समाज ने आज "विश्व आदिवासी दिवस" मनाकर पूरे जगत को यह संदेश दिया हैं कि उनको किसी भी कीमत में कम नहीं आँका जाए। क्योंकि इस आदिवासी पर्व पर आदिवासी समाज ने कहीं रक्तदान किया तो कहीं वृक्षारोपण किया हैं।
आज दिनांक 09 अगस्त 2017  बुधवार को मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़ क्या ? पूरे भारत में आदिवासी समाज ने विश्व आदिवासी दिवस मनाकर यह दर्शा दिया हैं कि अब हम अपने अधिकार के लिए संगठित हो रहे हैं। और भला क्यों न हो आदिवासी समाज को सक्षम जो बनना हैं।
आज यदि मीडिया,विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम स्थलों का जायजा लेते तो संभवतः पूरा देश को पता चल जाता की वाकई "विश्व आदिवासी दिवस" क्यों और कैसे मनाया जाता हैं। खेर कोई बात नहीं हमें तो अपनी आदिवासी सँस्कृति को भूलना नहीं हैं। हमें कोई विश्व रिकार्ड थोड़े न बनाना हैं औरों न ही हमें दंभ हैं। हमें खुशी इस बात की हैं कि विगत वर्षों के मुकाबले इस वर्ष जो विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर जो कार्यक्रम हुए हैं अधिकाधिक संख्या में समाज के लोगों ने बढ़चढ कर हिस्सा लिया।
अबकी बार आदिवासी समाज का उत्साह कुछ अलग ढंग से देखने को मिला जहाँ युवाओं ने कहीं पर मोटरसाइकल से रैली निकाली वही कुछ स्थानों पर आदिवासी वाद्य यंत्रों के साथ झूमते गाते कदम ताल मिलकर महारैली का हिस्सा रहे।
सबसे बड़ी बात यह रही कुछ जगह वृक्षारोपण तो कुछ जगह रक्तदान कर "विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।
आदिवासी समाजजन को जिन्होंने अपना अमूल्य समय देकर कार्यक्रम में उत्साह बनाया। सभी को जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता में अपनी भूमिका निभाई उन सभी को हार्दिक हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
मोहनलाल डॉवर
बदनावर जिला धार (म.प्र.)

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