जनजागरण चिन्तन शिविर कार्यक्रम विजाहेंण-विजवा मतई में

भील ऑटोनोमस कोंसिंल" ने ”आदिवासी महासभा" के कुशल मार्गदर्शन में विजय दादा और दिनेश दादा के नेतृत्व में आज दिनांक 16/10/2017 को पारम्परिक रूढ़िगत ग्राम सभा सशक्तिकरण!! जनजागरण चिन्तन शिविर कार्यक्रम के तहत राजस्थान के उदयपुर सम्भाग आसपुर ब्लॉक जिला-डूंगरपुर के गांवगणराज्य ग्राम सभा मोदपुर(विजाहेंण-विजवा मतई) में गुजरात,मध्यप्रदेश एव स्थानीय राजस्थान भील प्रदेश के 25000-30000 हजार आदिवासी सगाजनो ने भाग लेकर दिकुओ और आदिवासी के दलाल को मुह तोड़ जवाब देते हुए, संवैधानिक और रूढी प्रथा (अपना गाँव-अपना राज) की जानकारी हासिल किए.....
[1]आदिवासी परिवार "भील ऑटोनोमस कोंसिंल" ने संवेधानिक और कानूनी बातें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1), अनुच्छेद 13(3) (क), रूढ़ि एवं प्रथा, ग्राम सभा आदि की जानकारी दी गई!
[2]माननीय उच्चत्तम न्यायालय के आदिवासी के हित में आये विभिन्न फैसलो समता बनाम 1997,पी.रामी रेड्डी बनाम 1988, आर.एम. लोढ़ा केरल बनाम 2013, वेदांता बनाम 2013, रामकृपाल भगत बनाम 1969,कैलाश बनाम महाराष्ट्र 2011 आदि की जानकारी उपलब्ध कराई गई!
[3]रूढ़ि या प्रथा स्वयं ही खुद में एक संविधान है और अनुसूचित क्षेत्रों में इनको बिधि का बल प्राप्त है, जो कि किसी भी प्रशासनिक पदाधिकारी ,मंत्री,विधायक, संसद,न्यायाधीश के पास भी नहीं है।
[4]पहली बार यह साफ दिखाई पड रहा है कि अनुसूचित क्षेत्र राजस्थान के उदयपुर सम्भाग में नेता, पार्टी और चुनाव से आदिवासी तंग हो गए हैं और ज्यादातर कार्यक्रमों में इन लोगों को नजर अंदाज करना शुरू कर दिए हैं...
[5]क्या अब आदिवासी धीरे धीरे समझने लगे हैं कि आम चुनाव और राजनीतिक पार्टियां अनुसूचित क्षेत्रों में असवैधानिक हैं...?
[6]क्या इन्हीं दिक्कू ब्यवस्था के कारण ही आदिवासियों को अभी तक कथित स्वतंत्रता के बाद भी पिछले 70 सालों में दुर्गति हुई है...?
[7]इसके लिए कौन जिम्मेदार है.....स्वयं आदिवासी या मनुवाद ब्यवस्था...????
[8]बिरसावाद को कायम करेंगे, जब तक हक अधिकार नही मिलते तब तक उलगुलान जारी रहेगा!
#जागो आदिवासी लिखों आदिवासी पढ़ो ।।
#उलगुलान हुल जोहार!
भील राणा पूजा अम

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