आदिवासी प्रेरक व्‍यक्तित्‍व एवं महापुरूष

Jaypal Singh Munda

जयपाल सिंह मुंडा झारखंड आंदोलन के एक प्रमुख नेता थे। जयपाल एक जाने माने हॉकी खिलाडी भी थे । उनकी कप्तानी में भारत ने १९२८ के ओलिंपिक में भारत ने पहला स्वर्ण पदक प्राप्त किया।इन्होंने

रानी दुर्गावती (5 अक्टूबर, 1524 – 24 जून, 1564)) भारत की एक वीरांगना थीं जिन्होने अपने विवाह के चार वर्ष बाद अपने पति दलपत शाह की असमय मृत्यु के बाद अपने पुत्र वीरनारायण को सिंहासन पर बैठाकर उसके संरक्षक के रूप में स्वयं शासन करना प्रारंभ किया। इनके शासन में राज्य की बहुत उन्नति हुई। दुर्गावती को तीर तथा बंदूक चलाने का अच्छा अभ्यास था। चीते के शिकार में इनकी विशेष रुचि थी। उनके राज्य का नाम गढ़मंडला था जिसका केन्द्र जबलपुर था। वे इलाहाबाद के मुगल शासक आसफ खान से लोहा लेने के लिये प्रसिद्ध हैं।

*तिलका मान्झी एक आदिवासी योद्धा*
*Tilka Manjhi Was The First Indian Freedom Fighter*

*1857 की क्रांति से 100 साल पहले ही अंग्रेज़ों के खिलाफ इस सेनानी ने उठा लिए थे हथियार*

मेवाड के महाराणा "भील गणतंत्रों" की शरण में आए थे

हल्दी घाटी के युद्ध 2 1 जून,1 5 7 6 ईस्वी में मुगल बादशाह अकबर के सेनापति कछवाहा मानसिंह और मेवाड रजवाडे के महाराणा प्रताप के बीच हुए प्रसिद्ध युद्ध के बारे में सब जानते हैं.

सभी लोग यह भी जानते हैं कि हल्दी घाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की ओर से भील राणा पूँजा भील और उसके भील सिपाहीयों ने भी भाग लिया था....

" प्रकृति पूजक संस्कृति रक्षक आदि आनादिकाल वासी आदिवासी मूल वासी "

आदिवासियों के लिए देवता है आजादी के सेनानी टंट्या भील

देश में आजादी की पहली लड़ाई यानी 1857 के विद्रोह में जिन अनेक देशभक्तों ने कुर्बानियां दी थी, उन्हीं में से एक मुख्य नाम है आदिवासी टंट्या मामा। आजादी के इतिहास में उनका जिक्र भले ही ज्यादा न हो मगर वह मध्य प्रदेश में मालवा और निमाड़ अंचल के आदिवासियों के लिए आज भी किसी देवता से कम नहीं हैं। 

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नवली कुमारी गरासिया मूलत राजस्थान राज्य सिरोही जिले की आबूरोड तहसील की पंचायत क्यारियाँ के रेडवा कला गाव की निवासी है ! जिसकी उम्र वर्तमान में २५ है ! नवली कुमारी आदिवासी परिवार से है जो की रेडवाकला पहाड़ी क्षेत्र में है ! नवली के परिवार मेँ उसके ९ बहने और दो भाई थे ! उनकी माता की भी मृत्यु उनके पिता के कुछ समय बाद ही हो गई ! घर मेँ नवें नम्बर के होने से उनका नाम नवली रखा गया ! पापा बीएसएनएल विभाग मेँ कार्य करते थे ! इस वजह से वे बहार रहते थे ! नवली ने अपनी १२वीं तक की पढाई आबूरोड की अर्बुद स्कूल से की ! इसी बीच उनके पापा की मृत्यु होने से नवली की आगे की पढाई नहीं हो पाई !