आदिवासी प्रेरक व्‍यक्तित्‍व एवं महापुरूष

छत्तीसगढ़ के बस्तर के एक छोटे से गांव में पले-बढ़े गुंडाधुर ने अंग्रेजों को इस कदर परेशान किया था कि कुछ समय के लिए अंग्रेजों को गुफाओं में छिपना पड़ा था. अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाला ये क्रांतिकारी आज भी बस्तर के लोगों में जिंदा है.* देश के लिए अपनाा सब-कुछ न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों के साथ ही कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने आजादी के समर में अपना एक अलग योगदान दिया है, जिन्हें इतिहास कभी भुला नहीं सकता.

वीर नारायण सिंह (१७९५ - १८५७) छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, एक सच्चे देशभक्त व गरीबों के मसीहा थे।

सोनी सोरी ( छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित जबेली गाँव की एक आदिवासी विद्यालय शिक्षिका हैं।सन् 2011 में पुलिस द्वारा यह इल्जाम लगाया गया कि वे नक्सलियों को सूचनाएं उपलब्ध करवाती हैं। सोनी सोरी को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया और छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया। कोर्ट में पेशी से पहले इन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में रखा गया, जहां छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा उन्हें नंगा किया गया और बिजली के झटके लगाए गए। थर्ड डिग्री टार्चर की वजह से कोर्ट में पहले दिन पेशी के दौरान वे चल भी नहीं पा रहीं थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतंत्र जाँच करवाए जाने पर उनके यौनांग में तीन पत्थर पाए गए। सोनी

तिलका माँझी उर्फ जबरा पहाड़िया (11 फ़रवरी 1750-13 जनवरी 1785) भारत के आदिविद्रोही हैं। दुनिया का पहला आदिविद्रोही रोम के पुरखा आदिवासी लड़ाका स्पार्टाकस को माना जाता है। भारत के औपनिवेशिक युद्धों के इतिहास में जबकि पहला आदिविद्रोही होने का श्रेय पहाड़िया आदिम आदिवासी समुदाय के लड़ाकों को जाता हैं जिन्होंने राजमहल, झारखंड की पहाड़ियों पर ब्रितानी हुकूमत से लोहा लिया। इन पहाड़िया लड़ाकों में सबसे लोकप्रिय आदिविद्रोही जबरा या जौराह पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी हैं।

झारखंड की अपनी अलग संस्कृति और अपनी समवृद्ध विरासत रही है, एवम झारखंड के वीरों का अपना अलग विशेष इतिहास रहा है ।आज मैं झारखंड के एक ऐसे शक्शियत की बात कर रहा हूँ जिन्होने आदिवासियों के लिये झारखंड राज की मांग की प्रथम नींव रखी थी । आप समझ गये होंगे , जी हाँ , मैं उन्ही महान शक्शियत ‘जयपाल सिंह मुण्डा’ की बात कर रहा हूँ जिसे झारखंड की जनता ने ‘मरांग गोमके’ से नवाजा था यानी एक महान अगुआ । जयपाल सिंह मुण्डा एक ऐसा नाम और एक ऐसा आदिवासी नेता हैं जिसने ना सिर्फ झारखंड आंदोलन को परवान चढ़ाया बल्कि उस आंदोलन के प्रणेता बनकर संविधान सभा मे पूरे भारत के आदिवासियों का प्रतिनिधत्व करते हुवे उनके हक के

क्‍या आदिवासी समाज में किसी बालक/बालिका ने कोई उपलब्धि हासिल की है तो उसका पूरा विवरण हमें भेजे हम पूरी दुनियां को उसकी प्रतिभा से परिचय करवायेगें

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गोंडवाना नोबेल & शिक्षक रत्न श्री बीर बहादुर प्रसाद गोंड जी , उत्तर प्रदेश राज्य ब्यूरो प्रमुख ( गोंडवाना समय पत्रिका ) ,
ओलम्पियाड को -आर्डिनेटर इण्टरनेशनल है।