आदिवासी इतिहास

आदिवासियों का अपने क्षेत्रों में ‘स्वशासन’ (Self-government) की वर्तमान स्थिति

भारत के लगभग 20% भूभाग में 600 से भी अधिक आदिवासियों जिनकी संख्या 10 करोड़ है भारत के कुल जनसंख्या का सिर्फ 8% ही है। पूर्वकाल से आदिवासियों का अपने प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण अधिकार था। लेकिन आधुनिक युग की शुरुवात के पूर्व जब भारत में कई विदेशी आक्रमणकारी लोगो का प्रवेश होना शुरू हुआ तो इससे यहाँ के आदिवासी समुदाय के जनजीवन में कोई फर्क नहीं पड़ा क्योकि वे आक्रमणकारी लोग इन आदिवासियों के क्षेत्

भील इतिहास की एक झलक

भील जनजाति राजस्थान की प्रमुख प्राचीन जनजाति है। जिस प्रकार उत्तरी राजस्थान में राजपूतों के उदय से पहले मीणों के राज्य रहे, उसी प्रकार दक्षिणी राजस्थान और हाड़ौती प्रदेश में भीलों के अनेक छोटे-छोटे राज्य रहे है। प्राचीन संस्कृत साहित्य में भील शब्द लगभग सभी बनवासी जातियों जैसे निषाद, शबर आदि के लिए समानार्थी रूप से प्रयुक्त हुआ है। इस प्रकार भील संज्ञा प्राचीन संस्कृति साहित्य में उस वर्ग विशेष

मानगढ़ पे जूमलों जागे महाराज

वागड़ और गुजरात की सीमा पर स्थित मानगढ़ को राजस्थान के जलियावाला बाग नाम से जाना जाता हैं। यह बलिदान की धरती है जहां स्वदेशभिमान के लिए सर्व सामान्य से सर्वस्व समर्पित कर दिया। मार्गशीर्ष पूर्णिमा की धवल चांदनी यहां आज भी रक्तिम हो उठती है जबकि इस मौके पर यहां लोग पहुंचते है। उनकी आंखों के सामने निर्दयी हाथों से उठे बारूदी शस्त्र और असहाय परन्तु सत्याग्रही आदिवासियों के सम्मेलन का दृश्य सजीव हो ज