आदिवासी इतिहास

आधुनिक भाषाएं आदिवासी भाषा से विकसित हुई हैं

दुनिया की 6000 आधुनिक भाषाएं स्टोन एज की एक ही अफ्रीकन आदिवासी भाषा से विकसित हुई हैं. अंग्रेजी से लेकर चीनी और संस्कृत तक. दुनिया भर की यह जननी भाषा 50 से 70 हजार साल पहले अस्तित्व में आई थी. यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड, न्यूजीलैंड के विकासवादी मनोविज्ञानी शोधकर्ता क्वेंटिन एटकिंसन ने यह दावा विश्व की 504 भाषाओं के शब्दों, ध्वनियां और उनके टोन के आधार पर किया है.

क्या है सेरेंगसिया घाटी ? क्यों हुआ था सेरेंगसिया घाटी युद्ध ?

" सेरेंगसिया घाटी पश्चिमी सिंहभुम के कोल्हान क्षेत्र के टोन्टों प्रखंड के अंतर्गत आता है जो चाईबासा से 30 km दक्षिण दिशा में है। सेरेंगसिया घाटी में आदिवासी हो लोगों का युद्ध आंदोलन का ही एक हिस्सा था,जिसको भारत के इतिहासकारों ने अपने किताबों में जगह नहीं दी। हम आदिवासी अपने हक के लिये लड़े तो हमें विद्रोही करार दिया गया। हो लड़ाकों की वीर भुमि में राजाबासा के पोटो सर

खरसावां गोलीकांड (आदिवासियों का काला दिवस )

नए साल की पहली तारीख को जब लोग खुशियां मनाते हैं, तब खरसावां के आदिवासी अपनों की कुर्बानी के लिए आंसू बहाता है। आज भी यहां के आदिवासी क्षेत्र के लोग 1 जनवरी 1948 की घटना को याद कर सिहर उठते हैं, जब यहाँ के लोग अलग 'आदिवासी राज्य ' की मांग कर रहे सैकड़ों आदिवासियों पर प्रशासन द्वारा की अंधाधुंध फायरिंग का शिकार हुए थे।

भारत के आदिवासी ही सच्चे राष्ट्रवादी है।

एक दिन मैने किसी न्यूज़ चेंनल मे किसी राजनीतिक पार्टी के एक प्रवक्ता को 'राष्ट्र' और ' राष्ट्रवाद ' की परिभाषा देते हुये कहते सुना की जो व्यक्ति देश की आस्था और संस्कृति के संवेदनाओं से प्रेरित होता है वही सच्चा "राष्ट्रवादी" होता है । मुझे यह विचार सुनने मे तो अच्छे लगे लेकिन कूछ प्रश्न मेरे मन उठ रहे थे । भारत जैसी विशाल और विविधता से भरा देश में "राष्ट्रवाद" की प

झारखण्ड के आदिवासियों का भूमि कानून और उनका संशोधन क्यों और किसके लिए

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के मुद्दे पर झामुमो विधायक ‘दीपक बिरुवा’ व मनोहरपुर विधायक ‘जोबा मांझी’ ने 21 नवम्बर 2016 को  टीएसी सदस्य से राज्यपाल को पत्र प्रेषित कर इस्तीफा दे दिया था।  विधायक दीपक बिरुवा ने बताया कि वह  'जनजाति सलाहकार परिषद' का सदस्य है।  सरकार द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट की मूल भावना से विरुद्ध जबरन असंवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर संशोधन का प

बांसवाड़ा - एक नजर इतिहास की ओर

बहुरंगी संस्कृति एवं सप्तरंगी छ्टा,भीली संस्कृति से समृद्ध भीलों की कर्म स्थली के साथ देश- प्रदेश मे अपनी खास पहचान रखने वाला ''बांसवाड़ा''राजस्थान राज्य के दक्षिण मे तथा ''भील प्रदेश'' के उत्तरी छोर पर स्थित हे । भील प्रदेश के इस जिले के मध्य से सदानीरा माही नदी अपने सुमधुर पावन जल से इसे सिंचित ओर पोषित करती हे तो घोटिया आंबा धाम भील गणवीरो की प्रेरणा स्थली व जन जन की आस्था का केंद्र हे । प्रक

आदिवासियों का अपने क्षेत्रों में ‘स्वशासन’ (Self-government) की वर्तमान स्थिति

भारत के लगभग 20% भूभाग में 600 से भी अधिक आदिवासियों जिनकी संख्या 10 करोड़ है भारत के कुल जनसंख्या का सिर्फ 8% ही है। पूर्वकाल से आदिवासियों का अपने प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण अधिकार था। लेकिन आधुनिक युग की शुरुवात के पूर्व जब भारत में कई विदेशी आक्रमणकारी लोगो का प्रवेश होना शुरू हुआ तो इससे यहाँ के आदिवासी समुदाय के जनजीवन में कोई फर्क नहीं पड़ा क्योकि वे आक्रमणकारी लोग इन आदिवासियों के क्षेत्