सहस्राब्दियों बाद भी सुरक्षित है भित्ति चित्र

आदिवासीयो के इस धरती के मालिक होने के और मानवधर्म पूर्वी संस्कृति होने के और हिन्दू न होने के सबसे प्राचीनतम जीवन्त साक्ष्यों में से एक केबीकेएस डिस्कवर टीम द्वारा एक और नए व अदभुत गुफा चित्रों की खोज

आदिवासीयो के इस धरती के मालिक होने के और मानवधर्म पूर्वी संस्कृति होने के और हिन्दू न होने के सबसे प्राचीनतम जीवन्त साक्ष्यों में से एक
केबीकेएस डिस्कवर टीम द्वारा एक और नए व अदभुत गुफा चित्रों की खोज :

प्रथम विश्लेषण पर इनके तीन चरण दृष्टिगोचर हो रहे हैं.

एक 6000 से 8000 साल पुरानी , दुसरी 10000-30000 वर्ष से भी पुरानी भित्ति चित्र .
इनकी पेन्ट बनाने की तकनीकी इतनी विकसित थी कि आज भी इतने सहस्राब्दियों बाद भी सुरक्षित है
इन चित्रों में आदिवासी समुदाय के परंपरागत जीवन शैली की झलक दिखाई देती है.
कुछ भित्तिचित्र पहादीं पारी कुपार लिगों पेन से सम्बन्धित हैं.
कुछ चित्र हड़प्पीयन शैली से साम्यता लिए हुऐ हैं.
कुछ में टोटेमिक सिस्टम के प्रारंभिक चरण को इंगित करती हुई दिखलाई गई है. .

अब चाहे वे दिकू अब भी निर्लजता से चाइनीज सभ्यता /मोसोपोमिया/ऋग्वेदियन /सुमेरियन को चित्रकला की खोजकर्ता कहें या लिखने की शुरुआत करने वाले कहें .. लेकिन ये प्रमाण चिख चिखकर कह रहे हैं. . . कि कोया (गुफा ) सभ्यता मानव की प्रथम आवासीय परिसर थे . .
जिनमें चित्र कला, मनोरंजन, नृत्य, लेखन कला, टोटेमिक परिगणनाऐ, कृषि व शिकार तकनीकी, कोयतोरिन तकनीकी आदि का प्रारंभिक विकास हुआ है. . इसलिए द्रविड़ीयन परिवार के भाषाओं की ग्रान्डमदर /आजी /दादी कहलाने वाली गोण्डी लैंग में इनके लिए मूल शब्द विद्यमान है. इन स्थलों को अभी भी हमारे पेन सिस्टम में अपने पुरखों के द्वारा बनाए गए मानकर समय समय पर सेवा अर्पण किया जाता है. . .

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