सकवा

127 वर्ष पुराना जनजातीय हिजला मेला और आदिवासी वाद् यंत्र सकवा :
सकवा दो बोंगा आड़ग काना....
संताल आदिवासी में मान्यता है कि सकवा वाद् यंत्र में बोंगा (भगवान) वास करते है.यह बोंगा का आवाज है.इससे बोंगा खुश होते है .यह भैस के सिंग का होता है.सिन्दरा,बाहा आदि धार्मिक अनुष्ठान में इसका प्रयोग किया जाता है.
इसके साथ साथ सिंगघ(मुड़ा रहता है),मदानभेड़(जो सीधा होता है ) शादी आदि में बजाय जाता है.

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इसे बस्तर, छत्तीसगढ़ तथा म.प्र. (मंडला - जबलपुर क्षेत्र) में तुरही भी कहते हैं |

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