मैं उड़ना चाहती हूँ अपनी जिंदगी

मैं उड़ना चाहती हूँ,मैं जीना चाहती हूँ अपनी जिंदगी क्यों रोका है मुझे अपने ही घर के लोगो ने क्यों मैं उड़ नही सकती,क्यों मैं घूम नही सकती, क्यों मैं जॉब नही कर सकती,

मैं उड़ना चाहती हूँ,मैं जीना चाहती हूँ अपनी जिंदगी
क्यों रोका है मुझे अपने ही घर के लोगो ने
क्यों मैं उड़ नही सकती,क्यों मैं घूम नही सकती,
क्यों मैं जॉब नही कर सकती,
क्यों मैं अपने सपनो को पूरा नही कर सकती.
क्यों मुझे रोकते है, क्यों मुझे टोकते है,
जब पापा के घर थी तब भी आजाद नही थी,
अब पति के घर भी आजादी नहीं,
क्यों मुझे आजादी नही,क्यों मैं जी नही सकती,
क्यों मेरी कोई सुनता नहीं,
क्यों पति भी अपनी माँ का होता है,
मैं नही कहती माँ की बात न सुने पर मैं भी तो अपना घर छोड़ आई हूँ,
मुझे भी प्यार चाहिए,मुझे भी साथ चाहिए,
कोई तो समझे मेरी बात को,
कोई तो समझे मेरे जज्बातो को,
कोई तो समझे मेरी भावनाओ को,
क्यों मेरे सपने टूट गए,
क्यों मेरे अपने रूठ गये,
मैं जीना चाहती हूँ अपनी जिंदगी
मैं उड़ना चाहती हूँ अपनी जिंदगी

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