मथमना - आदिवासी समाज की सुरक्षा की सामाजिक गांरटी

आदिवासी समाज एक गणतांत्रिक और प्राक़तिक न्‍याय पर कार्य करने वाला प्रकति पूजक समाज है। आदिवासी समाज में मौताण नाम का कोई शब्‍द ही उपस्थित नही है। आदिवासी समाज में मौताण शब्‍द नही होकर मथमणा शब्‍द होता है और मथमना का अर्थ होता है - बदला। एक सिर के बदले एक सिर का बदला।

आजकल रोज अखबार में , मिडिया में मौताना बन्‍द करने के लिये खबरें आती रहती है। मौताना प्रथा बन्‍द करने के लिये लगातार दूसरे समाजों के ला्ेागों यहां तक की खुद आदिवासी समाज के पढे लिखे लाेागों द्वारा निरन्‍तर मांग उठाइ जा रही है।

अब प्रश्‍न ये है कि मौताना है क्‍या

अगर आदिवासी समाज के वास्‍तविक इतिहास को देखा जाये तो आदिवासी समाज में मौताण नाम का कोई शब्‍द ही उपस्थित नही है। आदिवासी समाज में मौताण शब्‍द नही होकर मथमणा शब्‍द होता है

और मथमना का अर्थ होता है - बदला।

एक सिर के बदले एक सिर का बदला।

आदिवासी समाज एक प्राक़तिक न्‍याय पर कार्य करने वाला प्रकति पूजक समाज है। इस समाज में पूरी दुनियां में वास्‍तविक और सही न्‍याय करने की परंपरा रही है। जब भारत में निरन्‍तर लगातार आर्यों एवं अन्‍य दूसरी जातियों का आक्रमण हो रहा था, तब आदिवासी समाज की जनसंख्‍या को लगातार मारा जा रहा था। जिससे समाज के लोगों में कमी आती जा रही थी।

गणतांत्रिक और प्राक़तिक न्‍याय के सिद्वांत को अपनाते हुये आदिवासी समाज ने मथमना पम्‍मपरा की शुरूआत की थी। जिसका उददेश्‍य अन्‍य समाज के लोगों में आदिवासी का डर गुसाना था, जिससे वो आदिवासी समाज के लोगों को मार नही सके। इससे गैर आदिवासी लाेग आदिवासी समाज पर हमला नही करते थे और आदिवासी समाज के लोग सुरक्षित और महफुज रहते थे।

परन्‍तु आज के दौर में अन्‍य लाेगों ने आदिवासी समाज की परम्‍पपराओं को बदनाम करके उसे समाप्‍त करने का कार्य लगातार किया जा रहा है। मथमना को मौताणा बनाकर पिडित व्‍यक्ति को परेशान किया जा रहा हैा

आदिवासी समाज के प्रबुद्व लाेगों से निवेदन है कि वास्‍तविक रूप मे अपनी परंपराओं को जाने और उसका रक्षण करें अन्‍यथा वो दिन दूर नही जब आदिवासी की सभी परंपरायें खत्‍म करके आदिवासी समाज को पंगु और बेसहारा बनाक भिखारियों की लाईन में खडा कर दिया जायेगा।

 

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