मंजिल : विनोद

हर इंसान की अपनी एक मंजिल होती है,जब तक वह इतना समझदार नहीं होता की उसे अपने जीवन में क्या करना है और किसके लिए तथा क्यों करना है | ये सब बातें किसी भी व्यक्ति के दिमाग में तब आती है जब कोई भी मनुष्य थोड़ा सा समझदार होता है ,देखिये ये वक्त भी तब आता है जब किसी इंसान के पास कई तरह की जिमेदारी आती है| लेकिन यहाँ पर सोचने वाली बात ये है की क्यों आखिर उस वक्त से पहले कोई समझता नहीं की मुझे अपनी जिंदगी में क्या करना ! ये भी सच है की जिसे इसका पता चल जाये वो शायद इस संसार का सबसे अलग इंसान होगा | आप किस विचार में डूबे हो जनाब हम सभी लोगो में से कोई भी इंसान तबतक ये जान ही नहीं पाता की हमारे जीवन की असल मंजिल क्या है ? और जब कोई इंसान उसे जान जाता है तो तभी से उस मंजिल को पाने की कोशिश में लग जाता है| क्या आपने अपनी मंजिल को चुना ? अगर नहीं तो अभी चुनिए और लग जाइये अपनी मंजिल को पाने में क्योंकि किसी ने कहा की देर हो जाये तो मंजिल हमारे हाथो में नहीं आती | में यहाँ आप सभी को कुछ महत्वपूर्ण बातें बताना चाहूंगा जो की शायद आपकी मंजिल को पाने में आपकी मदद करेंगे १.अपनी मंजिल को पाने के लिए भरपूर प्रयास कीजिये २.खुद से वादा कीजिये में अपनी मंजिल को बहुत ही जल्द हाशिल करूँगा ३.और खुद के साथ कभी भी किसी तरह का झूठ न बोले ४.आपकी मंजिल आपका इन्जार कर रही है और आपको जल्द से जल्द वहा पहुचना है ये महसूस कीजिये ५.और ये भी अनुभव कीजिए की मुझे अपनी मंजिल मिल गई है कोशिश कीजिये की आप हरपल अपनी असल मंजिल के बारे में सोचे और उसे पाने की राह खोजते हुए उस तक पहुंचे लेखक : विनोद कुमार, आबूरोड रेडियो जॉकी रेडियो मधुबन 90.4 ऍफ़ एम्

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