भील राणा पूँजा भील

मेवाड के महाराणा "भील गणतंत्रों" की शरण में आए थे

महान आदिवासी योद्वा भील राणा पूँजा

हल्दी घाटी के युद्ध 2 1 जून,1 5 7 6 ईस्वी में मुगल बादशाह अकबर के सेनापति कछवाहा मानसिंह और मेवाड रजवाडे के महाराणा प्रताप के बीच हुए प्रसिद्ध युद्ध के बारे में सब जानते हैं.

सभी लोग यह भी जानते हैं कि हल्दी घाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की ओर से भील राणा पूँजा भील और उसके भील सिपाहीयों ने भी भाग लिया था....

 

राणा पूंजा भील का जन्म मेरपुर के मुखिया दूदा होलंकी के परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम केहरी बाई था, उनके पिता का देहांत होने के पश्चात 15 वर्ष की अल्पायु में उन्हें मेरपुर का मुखिया बना दिया गया।

यह उनकी योग्यता की पहली परीक्षा थी, इस परीक्षा में उत्तीर्ण होकर वे जल्दी ही ‘भोमट के राजा’ बन गए।

अपनी संगठन शक्ति और जनता के प्रति प्यार-दुलार के चलते वे वीर भील नायक बन गए,

उनकी ख्याति संपूर्ण मेवाड़ में फैल गई।

लेकिन कुछ ऐतिहासिक तथ्य ऐसे हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं...

[1]. सिसौदिया वंशी महाराणा उदयसिंह (1 5 3 7...1 5 7 2) ने 1 5 4 0 ईस्वी में अपने श्वसुर पाली के सोनगरा अखैराज एवं मेवाड के स्वामिभक्त सामंतो के सहयोग से "बनवीर" को हराकर पैतृक राज्य चित्तौड पर कब्जा किया.

[2]. मुगल बादशाह अकबर के चित्तौड पर संभावित हमले को ध्यान में रखते हुए महाराणा उदयसिंह ने सन् 1 5 5 9 ईस्वी में वर्तमान उदयपुर की जगह पर निवासरत "उदा खराडी" के भील गणतंत्र(भील पाल) पर हमला करके सुरक्षित जगह पर अपना ठिकाना कायम किया,बाद में यही ठिकाना "उदयपुर नगर" बना.

[3]. मुगल बादशाह अकबर ने 2 3 अक्तूबर,1 5 6 7 ईस्वी को चित्तौड पर घेरा डाला,महाराणा उदयसिंह विश्वासी सामंतो को चित्तौड किले की सुरक्षा सौंप कर उदयपुर चला गया,2 5 फरवरी,1 5 6 8 को मुगल बादशाह अकबर ने चित्तौड किले पर विजय हासिल कर ली,इस युद्ध में जयमल,पत्ता,कल्ला जी राठौड़,ईसरदास चौहान ने ऐसी वीरता का प्रदर्शन किया जो इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जा सकता है.

[4]. 1 5 7 2 ईस्वी में महाराणा उदयसिंह की मृत्यु के बाद महाराणा प्रताप सिंहासन पर बैठे,गोगुंदा,कोटडा,गिर्वा,छप्पन,कांठल आदि आदिवासी इलाके(Tribal Territory) के संपूर्ण "भील गणतंत्रों"(भील पालों Bhil Republic) को अपने सहयोग के लिए राजी कर लिया,इसी श़ृंखला में पानरवा के "पूँजा भील" के रूप में विश्वसनीय "गण योद्धा" मिला जिसने आजीवन महाराणा प्रताप की सुरक्षा के लिए काम किया.

[5]. हल्दी घाटी के युद्ध (1 5 7 6) से 1 5 9 7 ईस्वी तक करीब 2 1 वर्ष तक यदि महाराणा प्रताप को मुगल बादशाह अकबर पूर्ण रूपेण परास्त नहीं कर पाया,अपने दरबार में आने को मजबूर ना कर सका,एकमात्र राजपूत रजवाडा जिसकी बहन बेटियों का डोला मुगल बादशाह को ना भेजना पड़ा उसके लिए किसी को श्रेय दिया जा सकता है तो वह है "भीलू राणा पूँजा भील"और उसके विश्वासपात्र "भील गणवीरों" को दिया जाना चाहिए था,मगर इतिहासकारों (Historian) ने ऐसा नहीं किया.

[6]. महाराणा प्रताप के बाद महाराणा अमरसिंह(1 5 9 7...1 6 2 0 ईस्वी) द्वारा 1 6 1 5 ईस्वी में मुगल बादशाह जहाँगीर से समझौता करने तक करीब 1 8 वर्ष तक मुगलों के लगातार हमलों को नाकाम करते हुए मेवाड की रक्षा की उसके लिए किसी को श्रेय दिया जा सकता है तो वे "भील गणतंत्र" ही थे,,,जिसकी शुरुआत "भीलू राणा पूँजा भील" ने की थी.

इस प्रकार कहा जा सकता है कि "मेवाड राज घराने की बहन, बेटियों की लाज मुगलों के हाथों किसी ने बचाई तो वह थे "भीलू राणा पूँजा भील" और "भील गणतंत्रों" के अदम्य साहस,बेजोड़ बहादुरी,अप्रतिम शौर्य,जन्मजात वीरता के सद् गुणों ने 2 1+1 8=3 9 वर्ष तक मुगल बादशाह अकबर और जहाँगीर के हाथों मेवाड को अजेय बना रखा,पूरे देश को जीतने वाली सेनाएं और सेनापति मेवाड को जीत नहीं पाए,,,उस इतिहास के सच्चे हकदार कोई है तो वे हैं "भील गणतंत्र"...हमें हमारे पुरखों की महान समाज व्यवस्था"गणतंत्र"(पाल.. Republic)पर गर्व है ध्यान ध्यान रखें...

भील गणतंत्र के लोग मेवाड महाराणा के पास नहीं गए थे बल्कि मेवाड के महाराणा "भील गणतंत्रों" की शरण में आए थे जय आदिवासी

Comments

आदिवासी योद्धा का इतिहास कुछ और ही था। और हमे कुछ और ही बताया जाता हे।आदवासी ऑनर ऑफ़ इंडिया हे। जय जोहार।।

राणा पुन्जा भील नही सोलंकी राजपुत था इनके पुर्वज देसूरी से पानरवा गये थे

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<p><span style="font-size:16px;">(१)&nbsp; &nbsp; &nbsp;उस समय हिंदूओ&nbsp; की ताकत संघठन&nbsp; से बढ़ी l</span></p>
<p><span style="font-size:16px;">(२)&nbsp; &nbsp; अब एकबार वापस सभी हिंदू को एकता रखकर&nbsp; राम मंदिर के लिए महासंग्राम करना चाहिए l</span></p>
<p><span style="font-size:16px;">(३)&nbsp; &nbsp; महत्वपूर्ण पूर्ण तथ्य यह हे की सभी हिंदू को&nbsp; एक होना हे l</span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="font-size:16px;">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;निवेदक&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-size:16px;">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;नाम -&nbsp; &nbsp;दिव्यांशु&nbsp; &nbsp;हिंदू&nbsp;</span></p>
<p><span style="font-size:16px;">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; सम्पर्क - 7689950537 , 8875040615</span></p>
<p><span style="font-size:16px;">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; धोइंदा&nbsp; &nbsp;राजसमन्द&nbsp; राजस्थान भारत&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</span></p>

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Rana Punja Bheel tha ...itihaaskar Beth kr likhna jante the Yudhha me kon lada ye to ladne valo ko hi pta h .
.. such yahi h k Bheel Is king

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