भराड़ी

संकट के समय में या हर परिस्थिति में हमारा साथ देने वाली - भरण - पौषण - रक्षण करने वाली भूमि या प्रकृति जो कि माँ का प्रथम स्वरूप है ।इसके साथ ही वे प्रथम महामानव मातृपितृ जिनके संयोग से हमारा अर्थात हमारे पुरखों का सतत् अवतरण होता आया है उनकी भी भराड़ी के समक्ष पूजा कि जाती है । तारे - चाँद - सूरज - धरती तथा मातृपितृ कि संयूक्त पूजा का प्राकृतिक स्वरूप ही भराड़ी है ।

भराड़ी *भर* धातु से बना शब्द है ।जो कि दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है ।(1)भर (2)आड़ी । भर + आड़ी अर्थात भराड़ी । भर का शाब्दिक अर्थ होता है -- भर अर्थात भरना और - भरने वाली - भरण पौषण करने वाली । तथा आड़ी शब्द का अर्थ होता है - आड़े आने वाली - रक्षा करने वाली - संरक्षिका - रक्षिका अर्थात माँ - माता । इस तरह भराड़ी का व्याख्यात्त्मक अर्थ यह हुआ कि संकट के समय में या हर परिस्थिति में हमारा साथ देने वाली - भरण - पौषण - रक्षण करने वाली भूमि या प्रकृति जो कि माँ का प्रथम स्वरूप है ।इसके साथ ही वे प्रथम महामानव मातृपितृ जिनके संयोग से हमारा अर्थात हमारे पुरखों का सतत् अवतरण होता आया है उनकी भी भराड़ी के समक्ष पूजा कि जाती है । तारे - चाँद - सूरज - धरती तथा मातृपितृ कि संयूक्त पूजा का प्राकृतिक स्वरूप ही भराड़ी है । इसी भराड़ी को मीणा समुदाय ने धराड़ी नाम दिया है ।जो कि भराड़ी का ही एक नाम है ।क्योंकि धराड़ी का शाब्दिक अर्थ धरा अर्थात पृथ्वी - भूमि ।और आड़ी अर्थात आड़े ाने वाली ।माँ के समान संकट में रक्षा करने वाली - धराड़ी धरा + आड़ी अर्थात धराड़ी । आगे और भी बहुत कुछ _ प्रकृति ही परमेश्वर है । जय जोहार जय आदिवासी आपकी जय जय भराड़ी

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Jai Adivasi

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