प्रदूषण ने सबको अपना शिकार बनाया है

मुझे यह बात बड़ा अजीब लगता है की महानगरों में प्रदूषण का स्तर जिस तरह से बढ़ा है की अब तो सभी लोगों को मास्क लगातें हुये देखना अब आम बात हो गई है ।

दिल्ली के सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल में श्वास से सम्बंधित रोगियो की संख्या बढ़ी है ।बड़े हो या छोटे छोटे बच्चे इस प्रदूषण ने सबको अपना शिकार बनाया है । लेकिन इतना सब कुछ होने के वावजूद प्रदूषण नियंत्रण के लिये सरकार क्या बेहतर और कारगर उपाय कर रही है पता नहीं । इस विस्तृत प्रदूषण के जिम्मेवार हर कोई है ।
दिल्ली में कई फेक्ट्रियों को बाहर कर दिया गया । लेकिन अभी भी दिल्ली के कुछ क्षेत्रोँ में धड़ल्ले से कुछ फेक्टरियां जहरीली रसायन और धुँआ से दिल्ली के आबो हवा को नुकसान कर रहा है । साथ ही साथ कुछ वाहन भी प्रदूषण को फैलाने के लिये जिम्मेदार है ।
प्रदूषण कोई जाति धर्म को नुकसान नहीं पहुँचाता यह पूरे मानव समुदाय को नुकसान पहुँचाता है । इस लिये अब हमें खुद निर्णय लेने की जरूरत है की हम जहाँ रहतें है उसके आप पास कैसा वातावरण होना चाहिये ।

हमें हमारे सामाजिक जीवन में भी बदलाव लाने की जरूरत है जैसे विवाह या किसी समारोह या दिवाली में पटाखे आदि ना जलाने का प्रण लेने से हमारे जीवन में खुशियाँ कम नहीं होगीं । यह संदेश सभी को देनी चाहिये ।
जल स्रोतों को बचाने की जिम्मेवारी भी हमारी है । अतः जल स्रोतों में अनावश्यक चींजें नहीं डाले । ऑक्सीजन अधिक से अधिक प्राप्त करने के लिये ज़्यादा से ज़्यादा वृक्ष लगाने का एक चलन शुरू होना चाहिये ।

हमें प्रकृति के संरक्षक भारत के आदिवासी समुदाय को धन्यवाद देना चाहिये क्योकिं इन्होनें हजारो वर्षौं से प्रकृति की रक्षा करतें आये है । वे ऐसे ही प्रकृति के संरक्षक नहीं कहे जाते बल्कि उन्होंंने इस पृथ्वी के कई जीवों को संरक्षण देने के लिये उन जीवों को अपने टोंटम (Surname) के रूप में अपनाया है । वे लोग वास्तव में प्रकृति के संरक्षक है और हमें उनसे सीखने की जरूरत है ।

 

Raju Murmu

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