पूरे देश ने मनाया महापर्व - विश्‍व आदिवासी दिवस 2017

पूरे भारत में एकमात्र समुदाय है जो विश्‍व स्‍तर पर अपना दिवस मनाता है और वो है - आदिवासी।

जी हां दोस्‍तों,

आदिवासी का महापर्व - विश्‍व आदिवासी दिवस।

विश्‍व आदिवासी दिवस क्‍या है

संयुक्त राष्ट्र संघ ने यह महसुस किया है कि २१ वी सदी मे भी विश्व के विभिन्न देशो मे निवासरत जनजातिय आदिवासी समाज अपनी उपेक्षा, गरीबी,  अशिक्षा,  स्वास्थ्य सुविधा का अभाव ,बेरोजगारी एव बंधवा मजदूर जैसी समस्याओ से ग्रसित है।जनजातीय समाज के उक्त समस्याओ के निकराकरण हेतु विश्व ध्यानाकर्षण के लिये १९९४ मे संयुक्त राष्ट्र संघ के महासभा द्वारा प्रतिवर्ष ९ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने का फैसला लिया गया तत्पश्चात पूरे विश्व यथा अमेरिका महाद्वीप अफ्रीकी महाद्वीप तथा एशिया महाद्वीप के आदिवासी बाहुल्य देशो मे ९ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस बड़े जोर शोर से मनाया जाने लगा जिसमे भारत भी प्रमुखता मे सम्मिलित हैं।

 

प्रतापगढ में रिमझिम बारिश में भी दिखा आदिवासी का जलवा

राजस्‍थान के प्रतापगढ में बारिश भी मेहरबान रही। बारिश में भी प्रतापगढ के आदिवासियों ने रैली निकाली और गैर नत्‍य किया। प्रतापगढ में समुदाय के सभी लोगों ने क़षि मंडी के सामने पारपंरिक अदांज में ऩत्‍य किया।

आदिवासी जागरुक युवा संगठन कोटड़ा द्वारा रैली का आयोजन

विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में कोटडा तहसील में आदिवासी जागरुक युवा संगठन कोटड़ा द्वारा रैली का आयोजन किया गया | रैली निचला थला से होते हुये बसस्टेंड से लखारा बाजार होते हुये आदिवासी विकास मंच के मैदान में पहुची |

जंहा कोटड़ा जैसे आदिवासी बहुल्य क्षेत्र से एकमात्र  राजस्थान आर्थिक एवं सांख्यिकी सेवा में  प्रथम बार चयनित हो कर सांख्यिकी अधिकारी बनवारी लाल बुम्बरिया को आमन्त्रित किया गया ।

उनके द्वारा आदिवासी अधिकार, संस्कृति व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला तथा जागरूक रह कर विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने को कहा ।

 

 

 

 

"आख़िर हमारी तीन साल की मेहनत रंग लाइ,

शासक पार्टी और सरकार को 23 साल बाद 'विश्व आदिवासी दिवस ' मनाने मजबूर होना पड़ा।

दुख इस बात का रहा की वो एक दिन के लिए भी आदिवासी नही बन सके वो 'वनवासी' ही रहे ...."

Raju Bhai Valvai - Gandhinagr, Gujrat

 

 

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस

जय जोहार

बोखलापाल डुगरपुर में युवा साथियों का जोश

नयन डोडा, मनिषा डामोर और अनिल डोडा

युवाओं ने खास आज के दिन के लिये

विशेष टी-शर्ट बनवायें।

आदिवासियों ने घरों में जलाये दिपक
डुंगरपुर राजस्‍थान के गलियाकोट से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार
गांव जुईतलाई ने आदिवासियों ने विश्‍व आदिवासी दिवस की खुशी में
अपने अपने घरों को दिपकों से रोशन किया।
प्रकृति संरक्षण और मानव समुदाय को बचाने उमड़े प्रकृति प्रेमी
डूंगरपुर

विश्व आदिवासी दिवस का कार्यक्रम आज डूंगरपुर के आदिवासी कॉलेज छात्रवास के प्रांगण में पूरे समुदाय ने अपनी सांस्कृतिक ,पारम्परिक वेषभूषा में मनाया गया

जिसमें सभी समाजिक संगठनों ,गमेतियो, पालवियो, जनप्रतिनिधियों ,महिलाओ बच्चों ने हिस्सा लिया....

 

तापी-गुजरात।

9 वीं अगस्त विश्व आदिवासी दिन का दबदबा।

 

झाबुआ मे विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मनाया गया!

ग्राम सारंगी(पेटलावद ) जिला झाबुआ मे विश्व आदिवासी दिवस बड़े ही ज़ोर शोर और धूमधाम से पूरे सारंगी नगर मे रैली के रूप मे मनाया गया! रैली मे lagbhag  30000 से 40000 के बीच आदिवासी समाज के युवा पुरुष, महिला, कर्मचारी, किसान, मजदूर, छात्र, छात्रा,सभी साथी उपस्थित हुए और कार्यक्रम को सफल बनाया! सभा मे समाज के होनहार छात्र छात्राओं जिन्होंने 10 वी 12 वी मे समाज मे टॉप किया हे उनका सम्मान किया

साथ ही समाज के नव चयनित आधिकारिये, और समाज के लिए जो निशुल्क कोचिंग चला रहे हे उनका भी सम्मान किया गया!आज का ये कार्यक्रम पूर्ण रूप से गैर राजनीतिक रहा, जिसमें सभी साथी भाई शामिल हुए!प्रोग्राम को सफल बनाने मे ajaks संघटन, आकाश संघटन,आदिवासी एकता परिषद्, जय आदिवासी युवा शक्ति संघटन, आदिवासी छात्र संघटन,शबरी माता संघटन,और समस्त आदिवासी संघटन का विशेष योगदान रहा

Comments

पहली बार 32 साल की उम्र में विश्व आदिवासी दिवस एक जश्न के रूप में मनाते हुए देखा गया। uno द्वारा आदिवासी दिवस घोषित हुए कई अरसे बीत गए। पहली बार आदिवासी दिवस मनाकर लगा की हम वास्तविक आदि+वासी है। जय जोहार जय आदिवासी।

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जय जोहार, भारत का एकमात्र समुदाय जिसका अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्व मनाया जाता हैं बड़ी खुशी है कि हमारा एक महापर्व मनाया जाता हैं, मुझे गर्व की में एक आदिवासी हु। जय जोहार जय आदिवासी।

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मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ|,मगर सदियों से हमारा आदिवासी समाज हिंदू धर्म की प्रथाओं में ऐसा जकड़ा हुआ है कि वह अपने आदिवासी धर्म के प्रति उदासीन सा प्रतीत होता है |हमें मिलकर उन्हें जाग्रत करना है और अपने गोंडी धर्म अर्थात आदिवासी धर्म की स्थापना करनी है |इसके अलावा संविधान की चौथी, पाँचवा, या छटवीं जो भी अनुसूची है उन्हें लागू करवाना है |

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मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ|

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मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूँ किन्तु इतने सालों से हिन्दू धर्म मे हम इतने रच बस गए है कि अपने आपको भी हिन्दू मानने लगे है ।
Adivasi samaj. com से जो मुझे जानकारी मिली है उससे मैं काफी प्रभावित हुआ हूं । अब मैं अपने समाज को भी इससे अवगत कराऊंगा ।

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