टेडा चिपटा

कोयतोरिन टेक्नोलॉजी में टेडा/चिपटा जिसमे बीज को वर्षो तक सुरक्षित रखा जाता है जो की कोयतोर्स अपने फसल के बीज को आने पीढ़ी (जनरेशन)में पूर्णअंकुरण हो और फ़सलोउत्पादन अधिक हो..इसलिए कोयतोर्स सुव्यवस्थित टेडा का बीज संरक्षण में करते है। जिसमे किसी भी प्रकार के किट,फंगस व अन्य परजीवियों का आक्रमण नही होता है क्योंकि उस टेडा/ चिपटा को रशोई रूम में होदेल (चूल्हे) (आग के धुंआ) के ठीक ऊपर में टँगा होता है। ...टेडा #पाउड़_आकि (सियाड़ी के पत्ते) सुव्यवस्थित रूप में गुत्ता होता।

टेडा जिस प्रकार प्रकृति में गोन्देला (समूह), अनुशसनतापूर्वक रहने वाला जीव हलिया/चपोड़ा( Red ant ) के घर #हल्ले_टेडा को समझ कर ..कोयतोरिन टेक्नोलॉजी में टेडा/चिपटा का आविष्कार हुआ। अतः इस प्रकार हम प्रकृति ज्ञान की धारा में प्रवाहित होते है। प्रकृति के साथ चलते है प्रकृति की सेवा करते है।

#कालो/कुमरी ..वर्षा व ग्रीष्म मौसम में बारिश व तेज गर्मी से बचने के लिए कोयतोरिन टेक्नोलॉजी में हमारे #महान_दादाओ (आधुनिक वैज्ञानिको से बड़ कर) ने आज से हजारोवर्ष पहले क्रमशः टेडा व कालो का आविष्कार किए। वो महान दादाओ जो इतिहास में महान वैज्ञानिक साबित हुए।आज वही महान दादाओ की खोज को आधुनिक दुनिया कॉपी पेस्ट कर अपने आप को सभ्य साबित करने में तुली है।

तुलसी नैताम
कोयतोरीन् टेक्नोलॉजी,कोया पुनेम और गोटुल एडुकेशन सिस्टम।
मालाकोट,कोण्डागाँव,बस्तर(छ. ग.) टीम- के.बी.के.एस.,उ.ब. काँकेर..!!

 

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