क्या आदिवासी समाज में मृत्यु भोज का आयोजन करना उचित हैं ?

क्या आदिवासी समाज में मृत्यु भोज का आयोजन करना उचित हैं ?आदिवासी समाज वैसे ही आर्थिक स्थिति से बेहद कमजोर हैं, और ऐसे में खर्चिले आयोजन करना समाज को पतन की ओर ले जाना माना जा सकता हैं।
आदिवासी समाज चूँकि प्रकृति की गोद में रचा बसा हैं, इसलिए ऐसे आयोजन जिसमें परिवार में एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती हैं और बदले में उस परिवार को पूरे गाँव और समाज को अपनी गाढ़ी कमाई या फिर उधार लेकर मृत्युभोज करवाना पड़ता हैं। यह कदापि उचित नहीं हैं, क्योंकि वैसे भी एक परिवार पर दु:ख आन पड़ा हैं, ऐसे में सामूहिक भोज्य करवाना किसी भी दृष्टि में ठीक नहीं हैं।
जरा सोचिए की यदि परिवार में कमाने वाला ही नहीं रहे और ऊपर से मृत्युभोज करवाना "दुबला ऊपर से खाने को नहीं" वाली कहावत चरितार्थ क्या नहीं होती, बल्कि होना तो चाहिए की जिस परिवार में किसी सदस्य का आकस्मिक निधन हो जाता हैं, तो समाज और परिवार वाले को उसकी मदद करनी चाहिए न की ऐसी फिजुल खर्चा करना चाहिए।
आज ऐसे कई समाज ने मृत्युभोज को सार्वजनिक रूप से बंद कर दिया हैं, फलस्वरूप वह समाज विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा हैं। याद रहे की समाज में कोई भी कुरूति, पुरानी रूढ़िवादी समाज को सदैव अवनति के मार्ग पर ले जाता हैं। इसलिए ऐसे आयोजनों पर आदिवासी समाज के सभी संगठन एक श्वर में आवाज उठानी चाहिए तथा यदि यह आयोजन करना भी हो तो उस राशि से गाँव में नोननिहालों के लिए एक स्कूल ही बनवा दिए जाए या फिर उस परिवार को अपने व्यवसाय के लिए कुछ ऐसा इंतजाम कर दिया जाए ताकी वह पूरे जीवन में कभी दूसरे के सामने हाथ फैला न पड़े।
क्या आपको लगता हैं, की हमारे आदिवासी समाज में मृत्यु भोज का आयोजन करना उचित हैं ?
प्रस्तुति-
मोहनलाल डॉवर
जयस टीम बदनावर-बड़नगर

Comments

BHAVIK PARGEE's picture

क्या यह तर्क संगत है ,परिवार के सदस्य की मौत का धर्म के नाम पर जश्न मनाया जाय ?क्या यह उचित है आर्थिक रूप से सक्षम न होते हुए भी अपने परिजनों का भविष्य दांव पर लगा कर पंडितों के घर भरे जाएँ ,और पूरे मोहल्ले को दावत दी जाय ?क्या परिवार को दरिद्रता के अँधेरे में धकेल कर मृतक की आत्मा को शांती मिल सकेगी ?क्या पंडितों को विभिन्न रूप में दान देकर ही मृतक के प्रति श्रद्धांजलि होगी ,उसके प्रति संवेदन शीलता मानी जाएगी ?

<p>ADIVASI SAMAJ ME HINDU DHARM KI TRH MIRTIU BOJ NHI HOTA HAI. JHARKHAN KE SARNA DHARM KE ADIVASIYON ME ESE DIRI OOR KHTEN HAIN JO DO SAAL YAA USSE ADIK SAMAYE KE BAAD KIYA JATA HAI, ETNE SAMAY K BAAD DIRI OOOR YA MIRTIU BHOJ HONE KA KEWL DHARMIK KARN NHI HAI BALKI SCINCTIFIC KARAN HAI. AAP KO ES BARE ME JADA JANKARI LENA HO TO JHARKHAND K WEST SINGHBHUM KE JHINKPANI ME KOL LAKO BODRA JI KE DUWARA ASTAPIT ATE TURTUNG PITKA AKARAH JHINKPANI JISE AASRAM B KHA JATA HAI, AAPKO JANKARA MIL JAYEGA</p>

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