उतरण - दिवी (काली चीडी) को तिल खिलने का आदिवासी पर्व

रीत-रूढ़ि से जुड़ा एक और ख़ास मौका आ रहा हे पढ़े लिखें सगाजनो **उतरण**यानि उत्तरायण=मकर सक्रांति अपनी अपनी रूढ़िगत ग्रामसभाओं में कैसे मनाया जाता हे इस पर आज चर्चा डिस्कस हो जाये

वैसे बता दू हमारे यहाँ फोटो में दर्शाये(कृष्ण खगा) पक्षी दिवी को पकड़ घरों में घूमा जाता हे जिससे ढ़ेर सारा अनाज रुपये एकत्र होते हे
एकत्रित धान को थोड़ा बहुत बेच कर धूणी मतई ऑवन के लिए नारियल व प्रसाद के रूप में खजूर तथा चवाणे को लाया जाता हे और थोड़ा अनाज धान को बाकळा,लपसी एव चावळ के लिये रखा जाता हे जो शाम को उतरण वळवनी के वक्त सभी मिलकर बना कर खाते हे

कहि ऐसा तो नही हे आधुनिकता की दौड़ में रूढ़िगत रीत को हम भूले जा रहे हे ???

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अम्बालाल सरपोटा

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