आदिवासी इतिहास की मशाल - किशोरी निलम बेन

किशोरी निलम बेन

"जो कौम अपना इतिहास नही जानती, वो जल्‍द ही खत्‍म हो जाती है।"

इस वाक्‍य को आदिवासी परिवार की किशोरी निलम बेन से ज्‍यादा कौन ज्‍यादा अच्छे से जान सकता है। जो लगातार आदिवासियों के गुम हो चुके इतिहास पर लगातार मेहनत करके नई पीढी के पास ला रही है।

इन्‍हे आदिवासी इतिहास की मशाल कहे तो भी कम होगा। किशोरी निलम बेन चतुर भाई जो कि वर्तमान में राबडाल विघालय दाहोद में कार्यरत है, निरन्‍तर अपने प्रयासों से आदिवासी महानायकों के इतिहास को नन्‍हे बालकों को आसानी से समझाने का कार्य करती है।

उन्‍हे पता है कि यहीं बालक आगे जाकर आदिवासी समाज का इतिहास रचे्गें। इन्‍ही में से कोई बिरसा मुण्‍डा तो कोई काली बाई बनेगी। एक तरफ जहां आदिवासी नायकों और महापुरूषों का इतिहास भुला दिया गया है, उन्‍हीं में से खोज खोज कर राेज बालकों को इतिहास बताना भ्‍ाी एक मेहनत भरा काम हैा

aadivasisamaj.com सलाम करता है ऐसे आदिवासी शिक्षकों का जो अतिरिक्‍त मेहनत करके आदिवासी बच्‍चों को भविष्‍य निखार रहे हैा

कक्षा में रोचक तरिके से अध्‍यापन कराते हुये

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Ha hu adivasi chu

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