आदिवासियों का वर्तमान पिछडे जैसा है क्यों ?

पुरे विश्व में आदीवासियो सा अनुभव धन धान्य वीरता मन जैसा किसी का नही है । वर्तमान परिवेश में आदिवासी युवा वर्ग भी कि...सी से कम नही है ।
लगन मेहनत का जीता जगता उदहारण आदिवासी समुदाय है।पहले भी राजा महाराजा हुआ करते थे ।
• मुख्य बिंदु पर प्रकाश डालने पर आदिवासी इतिहास पढ़ने पर पुराने गढ़ किला बुजुर्ग द्वार ताल खेत पहाड़ पत्थर देखने पर सब आदिवासियों के रजवाड़े का बखान करते है ।भारत देश में ही समस्त राज्यो में आदिवासियों ने अपना इतिहास छोड़ दिया है। जो वर्तमान में युवा आदिवासी वर्ग देख रही है।
पतन का का रण भी रहा की हमारे आदिवासी समुदाय को तोड़कर बिखराकर भेद पाकर आक्रमणकारी राज्यो को हथिया लिए ओर उनको उन्ही की जमीन से बे दखल कर दिया उन्हें जंगलों में रहने पर मजबूर कर दिया ।जिससे उन्होंने जंगलो में भी अपनी खेत बनाने पशु पलने पृकृति पूजा को जोवित रखा ।और अपने आप को स्वतन्त्र रखा कभी गुलामी में जीना दुसरो की बंदिश कभी पसंद नही किया।

आदिवासी समुदाय के लोंगों ने उच्चतम शिक्षा को ज्यादा क्यों नही अपना पाया वजह अनेक है।
उनमे योग्यता की कोई कमी नही बस उन्हें आगे आने से रोकने वालो ने कोई भी कसर नही छोड़ी इसलिए लोगो को नक्सली कहा गया।अमीर ओर गरीब की खाई बाढ़ सी आई और केदारनाथ हादसा की तरह बहा ले गई क्या सही आरक्षण आदिवासी यों को मिल पाया नही । इतिहास गवाह है अंग्रेजी हुकूमत को आदिवासियों ने नाकों चने चबवाये ।गुलामी नही की शेर थे शेर है शेर रहेंगे।

बस थोड़ी चिंता है हम पुरे भारतीय आदिवासी इक मंच पर कब होंगे तिथि युवा आदिवासी नेतृत्व को जिम्मेवारी लेने की है।कल के काम आज अभी निपटाना होगा।नही तो तथा कथित लोग हमारे लिए षड्यंत्र की शूली में झुलाने में लगे है। click to see more

कयो कहते है की भारत देश के आ ई ए एस आईपीएस के योग्य उम्मीदवार नही इसलिए पद खाली पड़े है ।
ये क्यों नही कहते की हम उन्हें आगे आने नही देते।हमारे आदिवासी पूर्वजो ने जो सहा वो हमअब कभी नही सहेंगे।
मेरे आदिवासी युवा शक्ति साथियो मानसिक गुलामी को तोड़कर इक बार जन्म देने वाली माता तुम्हारा भरण पोषण करने वाले पिता की मेहनत को जाया मत करो उठो जवानो अब तुम्हारे हाथो में पूरा भार आ चूका है।बिना थके बिना रुके चीटी की तरह झूम जाओ हाथी की तरह हो जाओ घोड़े की तरह शक्ति लगाओ तलवार की तरह तेज धार बन जाओ नदी की उफान बन जाओ ये मेरी लेखनी नही ये वर्तमान की मांग है।

संघर्ष ही जीवन है तो जीवन के मोल को समझो इतिहास फिर तुम्हारे नाम पर लिखा जायेगा ।
युवा देश की धड़कन है युवा में वो जोश है कुछ कर गुजरने की ।
आओ मिलकर नया इतिहास लिखे।
निकाल फेंको उस आवरण को जो तुम्हारे जमीर के लिए घातक है।छोड़ दो मानसिक गुलामी आप अपनी संस्कर्ति धर्म जल जंगल जमीन की रक्षा खुद करे।ले प्रेणना अपने पूर्वाजो से जिन्होंने तुम्हे नई जिंदगी देने के लिए अपनी जिंदगी को ही वीरता के लिए वीर गति दी ।
छोड़ दो चिंता अब क्या होगा की लग जाओ डट जाओ कूद जाओ मैदान में ।

जिस समाज ने तुम्हे जन्म दिया पाला पोसा बेटी दी रोटी दी जन्नत दी मर जाओगे तो कंधा भी देगा ।
उस समाज को आपने क्या दिया ।

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