सम्‍पादक की कलम से...

सकारात्मक सोच ही आदमी को आदमी बनाती है...उसे अपनी मंजिल तक ले जाती है

एक राजा के पास कई हाथी थे, लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था। बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था, इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था।

समय गुजरता गया  ...और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था। इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे।

एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया। उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया।

I AM, Because, WE ARE

कुछ आफ्रिकन आदीवासी बच्चों को एक मनोविज्ञानी ने एक खेल खेलने को कहा।

उसने एक टोकरी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए।

बच्चों को वृक्ष से 100 मीटर दूर खड़े कर दिया।

फिर उसने कहा कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकरी के सारे स्वीट्स मिलेंगे।

जैसे ही उसने, रेड़ी स्टेडी गो कहा.....

तो जानते हैं उन छोटे बच्चों ने क्या किया ?

सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए.
पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे।

हमारे विचार ही हमारा भविष्य तय करते है

मार्टिन लूथर ने कहा था...

"अगर तुम उड़ नहीं सकते तो, दौड़ो ! अगर तुम दौड़ नहीं सकते तो, चलो ! अगर तुम चल नहीं सकते तो, रेंगो !* *पर आगे बढ़ते रहो"

अपनी सोच ओर दिशा बदलो सफलता आपका स्वागत करेंगी...

रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो तो भी एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है। लेकिन यदि एक अच्छे जूते के अंदर एक भी कंकड़ हो तो एक अच्छी सड़क पर भी कुछ कदम भी चलना मुश्किल है।

यानी - "बाहर की चुनौतियों से नहीं, हम अपनी अंदर की कमजोरियों से हारते हैं".... _

हमारे विचार ही हमारा भविष्य तय करते है !

अपने ज्ञान और काबलियत की सुनिये और अपने लक्ष्य पर ध्यान करके आगे बढिए

एक बार कुछ वैज्ञानिकों ने एक बड़ा ही रोचक प्रयोग किया..

उन्होंने 5 बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में बंद कर दिया और बीचों -बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे..

जैसा की अनुमान था, जैसे ही एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ा..

पर जैसे ही उसने कुछ सीढ़ियां चढ़ीं उस पर ठण्डे पानी की तेज धार डाल दी गयी और उसे उतर कर भागना पड़ा..

पर वैज्ञानिक यहीं नहीं रुके,
उन्होंने एक बन्दर के किये गए की सजा बाकी बंदरों को भी दे डाली और सभी को ठन्डे पानी से भिगो दिया..

बेचारे बन्दर हक्के-बक्के एक कोने में दुबक कर बैठ गए..

मेरे मन की बात...

आदिवासी समाज की वेबसाईट पर आप सभी का स्‍वागत है। मुझे विश्वास है कि मेरे इस प्रयास के माध्‍यम से हमारे समाज के लोग आपसे में जुड् पायेगें। एक दूसरे के प्रति आत्मीयता बढ़ती रहेगी तथा हम एक-दूसरें के स्नेह और सहयोग के साथ समाज के समग्र विकास में भागीदार बने रहेंगे।

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