खाखलिया बावसी – भील पूर्वजों के थानक

आदिवासी गांवों में हर गांव के किनारे हमें प्राय: सर्पाका आक़ति से मढी हुई अनेक मूर्तियां दिखाई देती है।

आदिवासी समाज में यह खाखलिया बावसी के नाम से जानी जाती है।

समाज मे परिवार के पूर्वजों के देहान्ता के उपरान्तम उनकी याद में इन मूर्तियों का निर्माण किया जाता है।

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