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छत्तीसगढ़ की जेलें निर्दोष आदिवासियों से भरी हुई है कुछ जेलों में तो हालत यह है कि आदिवासियों को सोने के लिए जगह नहीं है वह 2 घंटे की शिफ्ट में ही सो पाते हैं 24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे उन्हें सोने के लिए मिलता है
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बच्चा सर तो झुका लेगा लेकिन जानता है, कि यह पत्थर की मूर्ति है। उसे न केवल इस मूर्ति पर संदेह आ रहा है। अब तुम पर भी संदेह आ रहा है, तुम्हारी बुद्धि पर भी संदेह आ रहा है। अब वह सोचता है ये बाप भी कुछ मूढ़ मालूम होता है। कह नहीं सकता, कहेगा, जब तुम बूढे हो जाओगे, मां-बाप पीछे परेशान होते है
इतिहास के पन्‍नों से
24 जून 2018 को गोंडवाना का ............
इतिहास के पन्‍नों से
आत्म गौरव की रक्षा के निमित्त प्राणोत्सर्ग करने का जज्बा इस क्षेत्र की माटी में हमेशा से रहा है । इसी का ज्वलन्त उदाहरण है- मानगढ धाम । गोविन्द गुरु सन 1923 से 1931 तक भील सेवा सदनझालोद के माध्यम से लोक जागरण, भगत दीक्षा व आध्यात्मिक विचार क्रांति का कार्य करते रहे।
कानुन की जानकारी
The Tribes Advisory Councils have been constituted in the Scheduled Areas States i.e. Andhra Pradesh, Chhattisgarh, Gujarat, Jharkhand, Himachal Pradesh, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odisha and Rajasthan and non Scheduled Areas States of Tamil Nadu and West Bengal.
कानुन की जानकारी
'झारखण्ड प्रदेश' जिसकी कल्पना देश की आजादी के पूर्व एक 'जनजाति बहुल प्रदेश' के रूप मे किया गया था । इस प्रदेश में लगभग 33 से भी ज्यादा जनजाति समुदायों का निवास सदियों से रहा है। मुख्यतः जनजाति समुदाय झारखण्ड के आंचलिक एवम वन प्रदेशो में निवास करते है और इनका जनजीवन बहुत ही सरल है। खेती इनका मुख्य पेशा है लेकिन इनका जीवन जंगलों पर भी आश्रित थे ।
परम्‍पराऐं
दिवी पक्षी को पकड़ घरों में घूमा जाता हे जिससे ढ़ेर सारा अनाज रुपये एकत्र होते हे, एकत्रित धान को थोड़ा बहुत बेच कर धूणी मतई ऑवन के लिए नारियल व प्रसाद के रूप में खजूर तथा चवाणे को लाया जाता हे
संस्‍क़ति
छाउ एक आदिवासी नृत्य है जो बंगाल, ओड़ीसा एवम झारखंड मे लोक्प्रिय है। छाउ नृत्य सामरिक भंगिमाओं और नृत्य का मिश्रण है। इसमे लडाई कि तकनीक एवम पशु कि गति और चाल को दर्शाया जाता है। इसमें ग्रामीण गृहिणी के काम-काज पर भी नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। इसे पुरुष नर्तक स्त्री का वेश धरकर करते हैं।
स्‍वास्‍थ्‍य अपडेटस
निंद्रा लकवा (Sleep paralysis) एक परिघटना है जिसमें व्यक्ति निंद्रा में पड़ते समय या निंद्रा से निकलते समय कुछ समय के लिए हिलने, बोलने या कोई भी प्रतिक्रिया करने में असमर्थता महसूस करता है।